23 Mar, 2019

संयुक्त राष्ट्र की ईकाई यूनेस्को द्वारा 19 मार्च 2019 को वर्ल्ड वॉटर डेवलपमेंट रिपोर्ट जारी की

संयुक्त राष्ट्र की ईकाई यूनेस्को द्वारा 19 मार्च 2019 को वर्ल्ड वॉटर डेवलपमेंट रिपोर्ट (अंतरराष्ट्रीय विश्व जल विकास रिपोर्ट) जारी की गई. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्व के लगभग 2.1 बिलियन लोगों को अस्वच्छ पानी पीने पर मजबूर होना पड़ रहा है.
वर्ल्ड वॉटर डेवलपमेंट रिपोर्ट-2019
•    यूनेस्को द्वारा जारी रिपोर्ट का शीर्षक है – Leaving No One Behind.
•    यूनेस्को द्वारा जारी इस रिपोर्ट के अनुसार विश्व भर में 4.3 बिलियन लोगों के पास स्वच्छ पानी की सुविधा नहीं है.
•    रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षित, सस्ता और विश्वसनीय पेयजल तथा स्वच्छता सेवाओं तक पहुँच सभी के मूलभूत अधिकार हैं.
•    अमीर लोगों को कम कीमत पर बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं जबकि गरीब लोग स्वच्छ पानी के लिए अधिक कीमत चुका रहे हैं.
•    विश्व के एक तिहाई लोग ग्रामीण क्षेत्रों में बेहद गरीबी की हालत में रह रहे हैं. यह लोग खाद्य असुरक्षा के साथ-साथ कुपोषण से भी जूझ रहे हैं.
•    वर्ष 2017 के अंत तक, अभूतपूर्व 68.5 मिलियन लोग संघर्ष, उत्पीड़न एवं मानवाधिकारों के उल्लंघन के परिणामस्वरूप अपने घरों से जबरन विस्थापित हो गए हैं. इसके चलते उन्हें स्वच्छ पानी की सुविधाओं से वंचित होना पड़ा है.
•    इसके अलावा 18.8 मिलियन लोग अचानक शुरू हुई आपदाओं के चलते विस्थापित हुए – इसके लिए जलवायु परिवर्तन एक प्रबल संभावना है.
•    बड़ी संख्या में लोगों के विस्थापन से प्राकृतिक संसाधनों पर गहरा असर पड़ा है. इससे उस स्थान की वास्तविक जनसंख्या तथा विस्थापन के बाद आकर बसने वाले लोगों को प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धतता के लिए जूझना पड़ रहा है.

यूनेस्को के सुझाव

चूंकि प्रभावित और कमजोर समूह सजातीय नहीं हैं, इसलिए पानी की आपूर्ति और स्वच्छता के बारे में नीतियों को अलग-अलग आबादी के बीच तथा प्रत्येक को संबोधित करने के लिए विशिष्ट तरीके से डिज़ाइन करने की आवश्यकता है. राज्यों को अपने दायित्व का पालन करते हुए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे सार्वजनिक भागीदारी की सुविधा प्रदान करें और लोगों के अधिकारों की रक्षा करें तथा उन्हें उनके अधिकार दिलाएं.

वर्ल्ड वॉटर डेवलपमेंट रिपोर्ट क्या है?

वर्ल्ड वॉटर डेवलपमेंट रिपोर्ट (WWDR) संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी की जाने वाली एक वैश्विक रिपोर्ट है जिसमें विश्व में पानी की उपलब्धता तथा इसकी स्थिति के बारे में जानकारी दी जाती है. इसमें स्थानीय समस्याओं, पानी से जूझ रहे विशेष क्षेत्रों के बारे में जानकारी दी जाती है. 

डब्ल्यूडब्ल्यूडीआर का विकास, विश्व जल आकलन कार्यक्रम (डब्ल्यूडब्ल्यूएपी) द्वारा समन्वित, संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों और संस्थाओं का संयुक्त प्रयास है, जो संयुक्त राष्ट्र के लिए जल संबंधी कार्यों को करते हैं. इसे पहले प्रति तीन वर्ष में एक बार जारी किया जाता था. सबसे पहले यह रिपोर्ट वर्ष 2003 में जारी की गई , इसके बाद यह 2006, 2009 और 2012 में जारी की गई. इसके बाद 2014 से यह प्रतिवर्ष जारी की जाने लगी है.

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न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष के नाम को लोकपाल पद के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा मंजूरी दी

न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष के नाम को लोकपाल पद के लिए 19 मार्च 2019 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा मंजूरी दी गई. पिनाकी चंद्र घोष देश के पहले लोकपाल बन गए हैं. 

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के साथ ही न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष देश के पहले लोकपाल नियुक्त हो गये हैं. लोकपाल की सूची में 9 ज्यूडिशियल मेंबर भी हैं. राष्ट्रपति भवन से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि भारत के राष्ट्रपति ने न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष को लोकपाल का अध्यक्ष नियुक्त करते हुए खुशी जाहिर की है. यह सभी नियुक्तियां संबंधितों के पद ग्रहण करने के दिन से प्रभावी होंगी.
भारत के पहले लोकपाल एवं अन्य सदस्य
लोकपाल: न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष
न्यायिक सदस्य: न्यायमूर्ति दिलीप बी. भोंसले, न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार मोहंती, न्यायमूर्ति   अभिलाषा कुमारी और न्यायमूर्ति अजय कुमार त्रिपाठी.
गैर न्यायिक सदस्य: दिनेश कुमार जैन, अर्चना रामसुंदरम, महेन्द्र सिंह और डॉ इंद्रजीत प्रसाद गौतम.
 न्यायमूर्ति पिनाकी घोष
•    न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज रह चुके हैं. 
•    वे आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश भी रहे हैं. 
•    उनके द्वारा सुनाये गये फैसलों में बार-बार मानवाधिकारों की रक्षा की बात दोहराई जाती रही है. 
•    न्यायमूर्ति घोष को मानवाधिकार कानूनों पर उनकी बेहतरीन समझ और विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है. 
•    वे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य भी हैं. 
•    विदित हो कि न्यायमूर्ति पी सी घोष ने ही शशिकला और अन्य को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी करार दिया था.

भारत में लोकपाल की स्थिति
•    सरकारी सेवकों के खिलाफ लोकपाल और लोकायुक्त कानून के तहत भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति का प्रावधान है.
•    लोकपाल उच्च सरकारी पदों पर आसीन व्यक्तियों द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार की शिकायतें सुनने एवं उस पर कार्यवाही करने के निमित्त पद है.
•    वर्ष 2011 में लोकपाल बिल लोकसभा में पेश किया गया जबकि इसे 18 दिसंबर 2013 को पारित किया गया.
•    इसके पांच वर्ष बाद भारत को पहला लोकपाल मिला है.
•    लोकपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति तथा लोकायुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करता है.
•    लोकपाल के पास सेना को छोड़कर किसी भी जन सेवक (किसी भी स्तर का सरकारी अधिकारी, मंत्री, पंचायत सदस्य आदि) के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत की सुनवाई का अधिकार होगा. 
•    वह इन सभी की संपत्ति को कुर्क करने का आदेश भी दे सकता है.
•    विशेष परिस्थितियों में लोकपाल को अदालती ट्रायल चलाने का भी अधिकार होगा.

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जीएसटी परिषद की 34वीं बैठक नई दिल्‍ली में आयोजित की गई

जीएसटी परिषद की 34वीं बैठक 19 मार्च 2019 को नई दिल्‍ली में आयोजित की गई. जीएसटी परिषद द्वारा अपनी 33वीं बैठक में किफायती मकानों के लिए 1 प्रतिशत और किफायती मकानों को छोड़ निर्माणाधीन मकानों पर 5 प्रतिशत की घटी हुई प्रभावी जीएसटी दर हेतु की गई सिफारिशों पर अमल के लिए इससे संबंधित प्रक्रियागत विवरण पर विचार-विमर्श किया गया.

जीएसटी (वस्‍तु एवं सेवा कर) परिषद ने इस दिशा में अग्रसर होने के लिए संबंधित तौर-तरीकों के बारे में निर्णय लिया.

मौजूदा परियोजनाओं के संबंध में विकल्‍प:
प्रमोटरों को उन मौजूदा परियोजनाओं (ऐसी इमारतें जिनके निर्माण कार्य के साथ-साथ वास्‍तविक बुकिंग भी 1 अप्रैल, 2019 से पहले ही शुरू हो गई है) पर पुरानी दरों (आईटीसी के साथ 8 प्रतिशत अथवा 12 प्रतिशत की प्रभावी दर) से ही टैक्‍स अदा करने का एकबारगी विकल्‍प दिया जाएगा जो 31 मार्च, 2019 तक पूरी नहीं हो पाएंगी.
इस विकल्‍प को निर्धारित समयसीमा में केवल एक बार ही अपनाया जा सकेगा और जिन मामलों में निर्धारित समयसीमा के भीतर इस विकल्‍प को नहीं अपनाया जाएगा उन मामलों में नई दरें लागू की जाएंगी.
नई टैक्‍स दरें
किफायती मकानों के निर्माण पर इनपुट टैक्‍स क्रेडिट (आईटीसी) के बि‍ना 1 प्रतिशत की नई दर निम्‍नलिखित के लिए उपलब्‍ध रहेगी:
ए) ऐसे सभी मकान जो जीएसटीसी द्वारा तय की गई किफायती घरों की परिभाषा पर खरे उतरते हैं (गैर-महानगर में क्षेत्रफल 60 वर्गमीटर/महानगरों में क्षेत्रफल 90 वर्गमीटर और कीमत 45 लाख रुपये तक).
बी) वर्तमान केन्‍द्रीय एवं राज्‍य आवास योजनाओं के तहत मौजूदा परियोजनाओं के अंतर्गत ऐसे निर्माणाधीन किफायती मकान जो 8 प्रतिशत की रियायती जीएसटी दर के लिए पात्र हैं (एक तिहाई भूमि एबेटमेंट के बाद).
इनपुट टैक्‍स क्रेडिट के बिना 5 प्रतिशत की नई दर निम्‍नलिखित के निर्माण पर लागू होगी :
ए) मौजूदा परियोजनाओं में किफायती घरों को छोड़ अन्‍य सभी मकान, चाहे इनकी बुकिंग 1 अप्रैल, 2019 से पहले या उसके बाद हुई हो। 1 अप्रैल, 2019 से पहले बुक किए गए मकानों के मामले में नई दर 1 अप्रैल, 2019 को या उसके बाद देय किस्‍तों पर लागू होगी.
बी) नई परियोजनाओं के तहत किफायती घरों को छोड़ अन्‍य सभी मकान.
सी) आवासीय अचल संपत्ति (रियल एस्‍टेट) परियोजना (आरआरईपी) के तहत दुकानों एवं कार्यालय जैसे सभी वाणिज्यिक अपार्टमेंट जिनका कुल कारपेट एरिया समस्‍त अपार्टमेंट के समग्र कारपेट एरिया के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो.

नई टैक्‍स दरों के लिए शर्तें:
एक प्रतिशत (किफायती घरों के निर्माण पर) और 5 प्रतिशत (किफायती घरों को छोड़ अन्‍य मकानों के निर्माण पर) की नई टैक्‍स दरें निम्‍नलिखित शर्तों के साथ लागू की जाएंगी:
ए) इनपुट टैक्‍स क्रेडिट नहीं मिलेगा.
बी) 80 प्रतिशत कच्‍चे माल (इनपुट) और इनपुट सेवाओं {पूंजीगत सामान, टीडीआर/जेडीए, एफएसआई, दीर्घकालिक लीज (प्रीमियम) को छोड़कर} को पंजीकृत व्‍यक्तियों से खरीदना होगा. 80 प्रतिशत से कम की खरीदारी होने पर बिल्‍डर को आरसीएम आधार पर 18 प्रतिशत की दर से टैक्‍स अदा करना होगा. हालांकि‍, गैर-पंजीकृत व्‍यक्ति से सीमेंट खरीदने पर आरसीएम के तहत 28 प्रतिशत की दर से टैक्‍स देना होगा और पूंजीगत सामान पर आरसीएम के तहत लागू दर से टैक्‍स अदा करना होगा.

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दिल्ली, चेन्नई और बेंगलुरू सबसे सस्ते शहरों में शामिल

रहने के लिहाज से दिल्ली, चेन्नई और बेंगलुरू सबसे सस्ते शहरों में शामिल हैं. इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट के 2019 के विश्वव्यापी निर्वाह व्यय (कॉस्ट आफ लिविंग) सर्वेक्षण के मुताबिक 'शीर्ष पर (महंगे होने की दृष्टि से) तीन शहर पेरिस, सिंगापुर और हांगकांग हैं.

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उष्णकटिबंधीय चक्रवात इडाई के कारण जिम्बाब्वे में 100 से अधिक लोगों की मौत

उष्णकटिबंधीय चक्रवात इडाई के कारण जिम्बाब्वे में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई है और यह संख्या बढ़कर 300 पहुंच सकती है.

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कज़ाख़िस्तान के राष्ट्रपति नूरसुल्तान नज़रबायेव ने अपने पद से इस्तीफा दिया

कज़ाख़िस्तान के राष्ट्रपति नूरसुल्तान नज़रबायेव ने 19 मार्च 2019 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. वे पिछले 30 साल से देश की सत्ता में थे.
राष्ट्र के नाम संबोधन में नूरसुल्तान नज़रबायेव ने कहा कि उन्होंने पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है. यह पद अभी नूरसुल्तान नज़रबायेव के करीबी माने जाने वाले कासीम-जोमात तोकायेव के पास है. वे पूर्व प्रधानमंत्री हैं.
नूरसुल्तान नज़रबायेव ने कहा कि उनके बचे कार्यकाल तक संसद के ऊपरी सदन के स्पीकर कासिम-जोमात तोकायेव कार्यवाहक राष्ट्रपति की भूमिका निभाएंगे.

सोवियत संघ के विघटन के   बाद से नूरसुल्तान नज़रबायेव ने तेल संपन्न देश कज़ाख़िस्तान का कम्युनिस्ट नेता   और फिर राष्ट्रपति के तौर पर नेतृत्व किया.  
नूरसुल्तान नज़रबायेव के बारे में:
•   नूरसुल्तान नज़रबायेव का जन्म 06 जुलाई 1940 को हुआ था.
•   सोवियत संघ ने साल 1991 में कज़ाख़िस्तान छोड़ा था और नूरसुल्तान नज़रबायेव तभी से इस एशियाई देश के राष्ट्रपति थे.
•   कज़ाख़िस्तान में बहुत से लोग नूरसुल्तान नज़रबायेव को हीरो तरह देखते हैं लेकिन कई ऐसे भी हैं जो उन्हें अहंकारी तानाशाह मानते हैं.
•   कज़ाख़िस्तान की राजधानी अस्ताना में नूरसुल्तान नज़रबायेव की तस्वीरें हर जगह दिख जाती हैं. इसे बड़े से बर्फ़ीले देश में हवाई अड्डों, सड़कों, स्कूल और चौक-चौराहों पर उनका नाम लिखा हुआ मिलता है.
•   नूरसुल्तान नज़रबायेव मध्य एशिया के उन इकलौते नेताओं में से एक हैं जो 21वीं सदी में अमरीका पर शासन करने वाले तमाम अमरीकी राष्ट्रपतियों से एक से ज्यादा बार मिल चुके हैं.
•   नूरसुल्तान नज़रबायेव कज़ाख़िस्तान के स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में उदय से पहले ही सत्ता में आ गए थे.
•   वे साल 1980 से साल 1991 के बीच वे कज़ाक कम्यूनिस्ट पार्टी के ताक़तवर फ़र्स्ट सेक्रेटरी बन गए थे.
•   साल 1991 में सोवियत संघ का पतन हुआ था और उन्होंने खुद को नए गणतंत्र के राष्ट्रपति पद के लिए इकलौते उम्मीदवार के तौर पर पेश किया. वे बड़े अंतर से चुनाव जीते.
•   उस चुनाव में नूरसुल्तान नज़रबायेव को 90 फीसदी से भी ज्यादा वोट मिले थे. हालांकि उनका कार्यकाल केवल चार साल का ही था. लेकिन उन्होंने कज़ाख़िस्तान की संसद में एक क़ानून पारित किया जिसमें उन्हें ये छूट दी कि वे आजीवन राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ सकें. कज़ाख़िस्तान के संविधान के अनुसार कोई व्यक्ति केवल दो कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति बन सकता है.
भारत- कज़ाख़िस्तान:
गौरतलब है कि भारत- कज़ाख़िस्तान के बीच काफी मजबूत संबंध रहे हैं. भारत के विदेश मंत्रालय ने अगस्त 2018 में एक बयान में कहा था की भारत और कज़ाख़िस्तान की रणनीतिक साझेदारी और बहुमुखी संबंध साल 2015 और साल 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कज़ाख़िस्तान दौरे से मजबूत हुए हैं.

बता दें कि भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अगस्त 2018 में ही कज़ाख़िस्तान का दौरा किया था. उन्होंने अपने दौरे के दौरान अस्ताना में कज़ाख़िस्तान के विदेश मंत्री कैरात अब्द्राखमानोव के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की थी.

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जम्मू-कश्मीर के इरफान रमज़ान शेख को शौर्य चक्र से सम्मानित किया

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जम्मू-कश्मीर के इरफान रमज़ान शेख को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया. इरफान ने वर्ष 2017 में 14 साल की उम्र में उसके घर पर तीन आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले को नाकाम किया था.

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बिहार के 21 शहरों में ई-किसान भवन बनाने के लिए योजना

बिहार के 21 शहरों में ई-किसान भवन बनाने के लिए योजना एवं विकास विभाग ने 10 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं. गौरतलब है कि इन शहरों में ई-किसान भवन बनाने के लिए कृषि विभाग ने योजना एवं विकास विभाग को पत्र लिखा था.

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भारतीय स्टेट बैंक ने योनो कैश मोबाइल एप्प लांच किया

हाल ही में भारतीय स्टेट बैंक ने योनो कैश मोबाइल एप्प लांच किया, इसके द्वारा बैंक के ग्राहक एटीएम से बिना कार्ड के धन निकासी कर सकते हैं.

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भारत और श्रीलंका के बीच मित्र शक्ति नामक युद्ध अभ्यास का आयोजन किया

भारत और श्रीलंका के बीच 26 मार्च से 8 अप्रैल के बीच मित्र शक्ति नामक युद्ध अभ्यास का आयोजन किया जायेगा. इस सैन्य अभ्यास का आयोजन भारत और श्रीलंका के बीच सैनिक कूटनीति के हिस्से के रूप में प्रतिवर्ष किया जाता है.

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