16 Feb, 2019

विशेषज्ञ समिति ने राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी 375 रुपये प्रति दिन करने का सुझाव दिया

विशेषज्ञ समिति ने आवश्यकता आधारित राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी 375 रुपये प्रति दिन (9,750 रुपये प्रति माह) तय करने का सुझाव दिया है।

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वाइस एडमिरल एस.एन. घोरमाड़े ने पूर्वी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ का पदभार ग्रहण किया

वाइस एडमिरल एस.एन. घोरमाड़े, एवीएसएम, एनएम ने 14 फरवरी, 2019 को विशाखापट्टनम में पूर्वी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ का पदभार ग्रहण किया। उनके पास नौसेना के अंदर नेवीगेशन तथा दिशा के क्षेत्र में विशेषज्ञता है।

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प्रधान मंत्री श्रम योगी मान-धन को शुरू किया

प्रधान मंत्री श्रम योगी मान-धन (PM-SYM) को 15 फरवरी 2019 से श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है। अंतरिम बजट में घोषित योजना को हाल ही में मंत्रालय द्वारा अधिसूचित किया गया है। देश के असंगठित क्षेत्र में 42 करोड़ श्रमिकों के शामिल होने का अनुमान है।

PM-SYM की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:-

1. न्यूनतम बीमित पेंशन: PM-SYM के तहत प्रत्येक अभिदाता को 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद न्यूनतम  3000 /- रूपये प्रति माह की न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन प्राप्त होगी।

2. पारिवारिक पेंशन: पेंशन की प्राप्ति के दौरान, यदि ग्राहक की मृत्यु हो जाती है, तो लाभार्थी का जीवनसाथी लाभार्थी द्वारा प्राप्त पेंशन का 50% पारिवारिक पेंशन के रूप में प्राप्त करने का हकदार होगा। पारिवारिक पेंशन केवल पति या पत्नी के लिए लागू होती है।

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केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के सुशील चंद्रा को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अध्यक्ष सुशील चंद्रा को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया है। दिसंबर 2018 में अपने पूर्ववर्ती ओ.पी. रावत के अतिरेक पर मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में तत्कालीन चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा की नियुक्ति के बाद यह पद खाली हो गया था।

पूर्व नौकरशाह अशोक लवासा पहले और वरिष्ठतम चुनाव आयुक्त हैं। 1980 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के अधिकारी, श्री चंद्र एक IIT स्नातक हैं। उनकी नियुक्ति लोकसभा चुनाव से कुछ हफ्ते पहले हुई है।

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संयुक्त राष्ट्र बाल निधि ने 'फैक्टशीट चाइल्ड मैरिजेज़ 2019' जारी की

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र बाल निधि (UNICEF) ने एक रिपोर्ट, 'फैक्टशीट चाइल्ड मैरिजेज़ 2019' जारी की है जिसके अंतर्गत कहा गया है कि भारत के कई क्षेत्रों में अब भी बाल विवाह हो रहा है। इसमें कहा गया है कि पिछले कुछ दशकों के दौरान भारत में बाल विवाह की दर में कमी आई है लेकिन बिहार, बंगाल और राजस्थान में यह प्रथा अब भी जारी है।

भारत के संदर्भ में यूनिसेफ की रिपोर्ट:-
•    यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार, बंगाल और राजस्थान में बाल विवाह की यह कुप्रथा आदिवासी समुदायों और अनुसूचित जातियों सहित कुछ विशेष जातियों के बीच प्रचलित है।

•    रिपोर्ट में कहा गया है कि बालिका शिक्षा की दर में सुधार, किशोरियों के कल्याण के लिये सरकार द्वारा किये गए निवेश व कल्याणकारी कार्यक्रम और इस कुप्रथा के खिलाफ सार्वजनिक रूप से प्रभावी संदेश देने जैसे कदमों के चलते बाल विवाह की दर में कमी देखने को मिली है।

•    रिपोर्ट के अनुसार 2005-2006 में जहाँ 47 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र से पहले हो गई थी, वहीं 2015-2016 में यह आँकड़ा 27 फीसदी था।

•    यूनिसेफ के अनुसार, अन्य सभी राज्यों में बाल विवाह की दर में गिरावट लाए जाने की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है किंतु कुछ ज़िलों में बाल विवाह का प्रचलन अब भी उच्च स्तर पर बना हुआ है।

वैश्विक संदर्भ में यूनिसेफ की रिपोर्ट:-
•    मौजूदा समय में विश्व भर में लगभग 65 करोड़ ऐसी लड़कियाँ/महिलाएँ हैं जिनकी शादी 18 वर्ष की उम्र से पहले ही कर दी गई है, जबकि बचपन में लड़कियों की शादी कर दिये जाने के मामले में यह संख्या प्रतिवर्ष करीब 1.2 करोड़ है।
•    दक्षिण एशिया में बाल विवाह की दर 40 प्रतिशत (वैश्विक दर की) है, जबकि उप-सहारा अफ्रीका में बाल विवाह की दर 18 प्रतिशत (वैश्विक दर की) है।
•    लैटिन अमेरिका और कैरिबियन में बाल विवाह की स्थिति में बदलाव नहीं आया है। 
•    पिछले एक दशक में बाल विवाह की दर में 15 प्रतिशत की कमी आई है जिसके तहत लगभग 2.5 करोड़ बाल विवाह होने से रोके गए हैं।

बाल विवाह के कारण:-
यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार गरीबी, लड़कियों की शिक्षा का निम्न स्तर, लड़कियों को आर्थिक बोझ समझना, सामाजिक प्रथाएँ एवं परंपराएँ बाल विवाह के प्रमुख कारण हैं। भारत में बाल विवाह पर रोक संबंधी कानून सर्वप्रथम सन् 1929 में पारित किया गया था। बाद में सन् 1949, 1978 और 2006 में इसमें संशोधन किये गए। बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के नए कानून के तहत बाल विवाह ।

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गुजरात सरकार ने गोधरा रेल नरसंहार के 17 साल बाद किया मुआवजे का ऐलान

गुजरात सरकार ने गोधरा में ट्रेन जलाए जाने की 2002 की घटना में मरने वाले 52 लोगों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये मुआवज़ा देने का घोषणा किया है। गुजरात हाईकोर्ट ने वर्ष 2017 में राज्य सरकार और रेलवे को पीड़ितों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये मुआवज़ा देने का आदेश दिया था।

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फ्रेंच वैज्ञानिकों ने GPS इस्तेमाल किए बिना चलने वाला ‘पहला’ रोबोट बनाया

फ्रेंच वैज्ञानिकों ने पहला ऐसा रोबोट बनाने का दावा किया है जो बिना जीपीएस (GPS) इस्तेमाल किए आस-पास के वातावरण का निरीक्षण कर अपने बेस पर लौट सकता है।

यह रोबोट ऑप्टिकल कम्पास के ज़रिए दिशा और ऑप्टिकल मूवमेंट सेंसर की मदद से तय की गई दूरी निर्धारित करता है। बतौर वैज्ञानिक, यह रेगिस्तानी चींटियों की नैविगेशन क्षमता से प्रेरित है। 
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह रोबोट अपने वातावरण को पहचान सकता है और बिना जीपीएस या नक्शे के चल सकता है। यह खोज स्वचालित वाहनों के परिचालन के लिए नये रास्ते खोल सकती है। फ्रेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च (सीएनआरएस) के अनुसंधानकर्ताओं ने ‘एंटबोट’ नामक इस रोबोट के डिजाइन के लिए रेगिस्तान में रहने वाली चींटियों से प्रेरणा ली।

ये चींटियां रेगिस्तान में सीधी धूप में खाने की तलाश में सैकड़ों मीटर तक चल सकती हैं और उसी रास्ते से बिना भटके वापस आ सकती हैं। अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि नये ‘एंटबोट’ रोबोट में भी रेगिस्तानी चींटियों की रास्ते पहचानने की बेमिसाल क्षमता का अनुसरण किया गया है। इस रोबोट का वजन केवल 2.3 किलोग्राम हैं। यह रोबोट जटिल वातावरण में स्थानांतरित करने की अनुमति देता है।
जीपीएस (GPS) क्या है?
जीपीएस (Global Positioning System) एक वैश्विक नौवहन उपग्रह प्रणाली है जिसका विकास संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा विभाग ने किया है। इस प्रणाली ने 27 अप्रैल 1995 से पूरी तरह से काम करना शुरू कर दिया था। वर्तमान समय में जीपीएस का प्रयोग बड़े पैमाने पर होने लगा है। इस प्रणाली के प्रमुख प्रयोग नक्शा बनाने, जमीन का सर्वेक्षण करने, वाणिज्यिक कार्य, वैज्ञानिक प्रयोग, सर्विलैंस और ट्रेकिंग करने तथा जियोकैचिंग के लिये भी होते हैं। आरंभिक चरण में जीपीएस प्रणाली का प्रयोग सेना के लिए किया जाता था, लेकिन बाद में इसका प्रयोग नागरिक कार्यो में भी होने लगा।

जीपीएस रिसीवर अपनी स्थिति का आकलन, पृथ्वी से ऊपर स्थित किये गए जीपीएस उपग्रहों के समूह द्वारा भेजे जाने वाले संकेतों के आधार पर करता है। एक बार जीपीएस प्रणाली द्वारा स्थिति का ज्ञात होने के बाद, जीपीएस उपकरण द्वारा दूसरी जानकारियां जैसे कि गति, ट्रेक, ट्रिप, दूरी, जगह से दूरी, वहां के सूर्यास्त और सूर्योदय के समय के बारे में भी जानकारी एकत्र कर लेता है। भारत में भी इस प्रणाली के प्रयोग बढ़ते जा रहे हैं।
रोबोट क्या है?
रोबोट एक आभासी या यांत्रिक (mechanical)कृत्रिम (artificial) एजेंट है। व्यवहारिक रूप से, यह प्रायः एक विद्युत यांत्रिकी निकाय होता है, जिसकी दिखावट और गति ऐसी होती है की लगता है जैसे उसका अपना एक इरादा और अपना एक अभिकरण है। रोबोट शब्द भौतिक रोबोट और आभासी (virtual) सॉफ्टवेयर एजेंट (software agent), दोनों को ही प्रतिबिंबित करता है।

पहला रोबोट युनिमेट, 1961 में ठप्पा बनाने वाली मशीन से धातु के गर्म टुकड़ों को उठाकर उनके ढेर बनाने के लिए लगाया गया था। आज, वाणिज्यिक और औद्योगिक रोबोट व्यापक रूप से सस्ते में और अधिकसे अधिक सटीकता और मनुष्यों की तुलना में ज्यादा विश्वसनीयता के साथ प्रयोग में आ रहे हैं। रोबोट्स का प्रयोग व्यापक रूप से विनिर्माण (manufacturing), सभा और गठरी लादने, परिवहन, पृथ्वी और अन्तरिक्षीय खोज, सर्जरी, हथियारों के निर्माण, प्रयोगशाला अनुसंधान और उपभोक्ता और औद्योगिक उत्पादन के लिए किया जा रहा है।

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने नया स्पेस टेलीस्कोप वर्ष 2023 तक लॉन्च कर सकती

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने बताया है कि वह ब्रह्मांड की उत्पति और विकास का पता लगाने के लिए 'SPHEREx' मिशन के तहत नया स्पेस टेलीस्कोप वर्ष 2023 तक लॉन्च कर सकती है। करीब 1,700 करोड़ रुपये (लॉन्च कॉस्ट छोड़कर) की लागत वाले इस मिशन की अवधि 2 साल होगी।

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एअर इंडिया की 2% हिस्सेदारी कंपनी के कर्मचारियों को देने का प्रस्ताव

केंद्र सरकार ने नकदी संकट से जूझ रही एअर इंडिया की ग्राउंड हैंडलिंग कंपनी 'एअर इंडिया एयर ट्रांसपोर्ट सर्विसेज़' (एआईएटीएसएल) में 100% हिस्सेदारी बेचने की पेशकश की है। इसके अंतर्गत रणनीतिक बिक्री के तहत 98% हिस्सेदारी बेचने जबकि 2% हिस्सेदारी कंपनी के कर्मचारियों को देने का प्रस्ताव है।

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पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस लेने की घोषणा की

भारत ने पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर आत्मघाती आतंकी हमले के विरोध में पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा एक्शन लेते हुए पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) का दर्जा वापस लेने की घोषणा की है.

हमले के मद्देनजर 15 फरवरी 2019 को पीएम मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा पर कैबिनेट समिति (CCS) की बैठक हुई. बैठक में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, तीनों सेनाध्यक्ष और सीआरपीएफ (CRPF) के डीजी ने भाग लिया. बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि पाकिस्तान को कूटनीतिक तौर पर अलग-थलग किया जाएगा.

घटना:
पुलवामा (जम्मू-कश्मीर)   में 14 फरवरी 2019 को सीआरपीएफ काफिले पर आत्मघाती आतंकी हमले में शहीद होने   वाले जवानों की संख्या मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 44 हो गई है. बतौर रिपोर्ट्स, सीआरपीएफ के करीब 70 वाहनों का काफिला 2547 जवानों को लेकर जा रहा था और उससे टकराने वाली एसयूवी में   350 किलोग्राम आईईडी   विस्फोटक था. रिपोर्ट के अनुसार उरी के बाद यह सबसे बड़ा आतंकी हमला है. बता दें कि यह   हमला श्रीनगर से सिर्फ 20 किलोमीटर की दूरी पर हुआ है.


इनमें से अधिकतर सीआरपीएफ   जवान अपनी छुट्टियां बिताने के बाद अपनी ड्यूटी पर लौट रहे थे. जम्मू कश्मीर   राजमार्ग पर अवंतिपोरा इलाके में लाटूमोड पर इस काफिले पर अपराह्न करीब साढ़े   तीन बजे घात लगाकर हमला किया गया.

मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन)  का दर्जा कब दिया गया?

भारत 01 जनवरी 1995 को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) का सदस्य बना था. डब्ल्यूटीओ बनने के साल भर बाद भारत ने पाकिस्तान को वर्ष 1996 में मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन)  का दर्जा दिया था लेकिन पाकिस्तान की ओर से भारत को ऐसा कोई दर्जा नहीं दिया गया था.

मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन)  का दर्जा लेने की प्रक्रिया:
बता दें कि विश्व व्यापार संगठन के आर्टिकल 21बी के तहत कोई भी देश उस सूरत में किसी देश से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस ले सकता है जब दोनों देशों के बीच सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर विवाद उठ गया हो. हालांकि इसके लिए तमाम शर्तें पूरी करनी होती हैं.

मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) क्या है?
दरअसल एमएफएन (एमएफएन)  का मतलब है मोस्ट फेवर्ड नेशन, यानी सर्वाधिक तरजीही देश. विश्‍व व्‍यापार संगठन और इंटरनेशनल ट्रेड नियमों के आधार पर व्यापार में सर्वाधिक तरजीह वाला देश (एमएफएन) का दर्जा दिया जाता है. एमएफएन का दर्जा मिल जाने पर दर्जा प्राप्त देश को इस बात का आश्वासन रहता है कि उसे कारोबार में नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा.

एमएफएन के दर्जा से क्या लाभ है?
एमएफएन का दर्जा कारोबार में दिया जाता है. इसके तहत आयात-निर्यात में आपस में विशेष छूट मिलती है. यह दर्जा प्राप्त देश कारोबार सबसे कम आयात शुल्क पर होता है. डब्ल्यूटीओ के सदस्य देश खुले व्यापार और बाज़ार से बंधे हैं मगर एमएफएन के नियम के तहत देशों को विशेष छूट दी जाती है. सीमेंट, चीनी, ऑर्गेनिक केमिकल, रुई, सब्जियों और कुछ चुनिंद फलों के अलावा मिनरल ऑयल, ड्राई फ्रूट्स, स्टील जैसी कमोडिटीज़ और वस्तुओं का कारोबार दोनों देशों के बीच होता है. भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 2012 के आंकड़े के अनुसार लगभग 2.60 बिलियन डॉलर का व्यापार होता है.

क्या भारत को होगा पाकिस्तान से यह दर्जा छीनने का नुकसान?
भारत अगर मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) का दर्जा खत्म करता है तो हो सकता है कि पाकिस्तान अपनी तरफ से भारत के साथ व्यापार ही रोक दे. भारत को ऐसे में घाटा हो सकता है लेकिन आतंकवाद से निपटने और देश की सुरक्षा के मद्देनजर भारत घाटे की कीमत पर भी ऐसा करने को तैयार हो गया है।
भारत में अब तक हुए बड़े आतंकवादी हमले पर:-
1993 मुंबई बम धमाका:-
12 मार्च 1993 को मुंबई   में आंतकियों ने एक बम धमाके को अंजाम दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आंतकियों   ने कुल 12 बम धमाके किए थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस धमाके में कुल 257 लोगों की   मौत हुई जबकि 717 नागरिक घायल हुए थे।

1998 कोयम्बटूर बम विस्फोट:-
कोयम्बटूर में 14 फरवरी   1998 को 11 जगहों पर बम धमाके हुए। इस जगह पर कुल 12 बम धमाके हुए। मीडिया रिपोर्ट्स   के अनुसार, कुल 58 नागरिकों की मौत हुई जबकि 200 नागरिक घायल हुए।

2001 संसद हमला:-
भारत की राजधानी दिल्ली   में 13 दिसंबर 2001 को संसद पर बड़ा आत्मघाती हमला हुआ था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,   इस हमले में 5 आतंकवादी मारे गए थे। जबकि दिल्ली पुलिस के 6 सहित संसद के 2   सुरक्षाकर्मी  शहीद हो गए थे।
2002 अक्षरधाम मंदिर हमला:-
गुजरात के गांधीनगर   स्थित अक्षरधाम मंदिर में दो आंतकियों ने 24 सितंबर 2002 को बड़ा हमला किया था। मीडिया   रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में 30 लोगों की मौत हुई थी जबकि 80 नागरिक घायल   हो गए थे।
2005 दिल्ली सिरियल ब्लास्ट:-
दिल्ली में दिवाली के   दो दिन पहले 29 अक्टूबर 2005 को सीरियल बम ब्लास्ट करके राजधानी दिल्ली को दहला   दिया गया था। आंतकियों ने 3 जगह बम धमाके किए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस   हमले में 62 लोगों की मौत हुई थी जबकि 210 नागरिक घायल हो गए थे।
2006 बांबे बम ब्लास्ट:-
मुंबई की लोकल ट्रेन   में आंतकियों ने 11 मिनट के अंदर 7 जगहों पर लगातार हमले हए थे। 11 जुलाई 2006   में हुआ ये हमला 1993 के धमाके के बाद से सबसे बड़ा धमाका था। मीडिया रिपोर्ट्स   के अनुसार, इस धमाके में 209 लोगों की मौत हुई थी जबकि 700 लोग घायल हुए थे।
2007 समझौता एक्सप्रेस धमाका:-
दिल्ली से लाहौर को   जोड़ने वाली समझौता एक्सप्रेस में 18 फरवरी 2007 को एक बड़ा धमाका हुआ था। बम   धमाका यात्रियों से भरी दो बोगियों में हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमले में 68 नागरिकों  की मौत हुई थी जबकि दर्जनों लोग घायल हुए थे।

26/11 मुंबई विस्फोट 2008:-
मुंबई में 26 नवम्बर   2008 को हुआ ये हमला इतिहास में अब तक सबसे बड़े हमलों में शुमार है। कुछ आंतकी   समुद्र के रास्ते से मुंबई में घुसे थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में कुल 164 लोगों की मौत हुई थी   जबकि 308 लोग जख्मी हो गए थे।
2008 जयपुर ब्लास्ट:-
जयपुर में 13 मई 2008   को 15 मिनट के भीतर 9 बम ब्लास्ट हुए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में 63 लोगों की मौत सहित 216 से   ज्यादा लोग घायल हुए थे।

2008 असम ब्लास्ट:-
मीडिया रिपोर्ट्स के   अनुसार,   असम में 30 अक्टूबर   2008 को हुए इस हमले में 81 लोगों की मौत हुई थी जबकि 470 लोग घायल हुए थे।

2016 पठानकोट हमला:-
पंजाब के पठानकोट   एयरफोर्स बेस में 02 जनवरी 2016 को कुछ आंतकवादियों ने हमला कर दिया था। आंतकी   सेना की वर्दी में घुसे थे। भारतीय सेना ने कड़ी कार्रवाई करते हुए सभी हमलावरों   को मार गिराया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मुठभेड़ में   3 जवान शहीद हो गए थे।

2016 उरी हमला:-
जम्मू कश्मीर के उरी   सेक्टर में LOC के पास आंतकियों ने 18   सितंबर 2016 को आर्मी हेडक्वार्टर पर बड़ा हमला किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के   अनुसार,   इस हमले में सेना के 18   जवान शहीद हुए थे। इस मुठभेड़ में भारतीय सेना ने सभी आंतकियों को मार गिराया था।

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