15 Mar, 2019

भारत में छह परमाणु उर्जा संयंत्र लगाने के लिए सहमति जताई

भारत और अमेरिका के मध्य आयोजित सामरिक सुरक्षा वार्ता में 13 मार्च 2019 को भारत में छह परमाणु उर्जा संयंत्र लगाने के लिए सहमति जताई गई. दोनों देशों द्वारा यह निर्णय लिया गया कि वे सुरक्षा व असैन्य परमाणु सहयोग को मजबूत करने के लिए भारत में छह परमाणु उर्जा संयंत्र लगायेंगे.

वॉशिंगटन में भारत और अमेरिका के बीच दो दिन तक हुई बातचीत के बाद इस पर सहमति व्यक्त की गई है. भारत की ओर से विदेश सचिव विजय गोखले और अमेरिका के स्टेट फॉर आर्म्स कंट्रोल एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी विभाग की अंडर सेक्रेटरी एंड्रिया थॉम्पसन ने इस चर्चा में भाग लिया था.

भारत-अमेरिका सामरिक सुरक्षा वार्ता
संयुक्त रणनीतिक वार्ता के दौरान, दोनों पक्षों ने वैश्विक सुरक्षा और परमाणु हथियारों के अप्रसार की चुनौतियों जैसे विस्तृत मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया.
इसके अतिरिक्त सामूहिक विनाश के हथियारों और उनके वितरण प्रणालियों के प्रसार को रोकने और ऐसे हथियारों तक आतंकियों तथा अनैतिक हाथों में पहुंचने से रोकने हेतु अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की.
दोनों राष्ट्रों ने द्विपक्षीय सुरक्षा और असैन्य परमाणु सहयोग को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें भारत में छह अमेरिकी परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना शामिल है.
अमेरिका ने 48 सदस्यीय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत की प्रारंभिक सदस्यता के अपने मजबूत समर्थन की भी पुष्टि की.
भारत-अमेरिका अन्तरिक्ष वार्ता
इससे पहले 12 मार्च 2019 को, भारत-अमेरिका अंतरिक्ष वार्ता का तीसरा दौर आयोजित किया गया था, जिसकी अध्यक्षता भारत के निरस्त्रीकरण और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के लिए अतिरिक्त सचिव इंद्रा मणि पांडे और यूएस असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट फॉर आर्म्स कंट्रोल, वेरिफिकेशन एंड कंप्लायंस येलम डीएस पोबले शामिल थे.

दोनों प्रतिनिधिमंडलों ने अंतरिक्ष के खतरों, संबंधित राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्राथमिकताओं और द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय मंच में आपसी सहयोग के अवसरों पर चर्चा की.

पृष्ठभूमि
भारत और अमेरिका ने अक्टूबर 2008 में असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इस सौदे ने द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा दिया, जो आज तक बरकरार है. सौदे का एक प्रमुख पहलू परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) था जिसने भारत को एक विशेष छूट दी जिससे वह कई देशों के साथ असैन्य परमाणु सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर कर सकता है. छूट के बाद, भारत ने अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, कनाडा, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, जापान, वियतनाम, बांग्लादेश, कजाकिस्तान और दक्षिण कोरिया के साथ असैन्य परमाणु सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं.

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भारतीय ओपनर रोहित शर्मा ने तीसरे सबसे तेज़ 8000 रन बनाने वाले खिलाड़ी बने

भारतीय ओपनर रोहित शर्मा अपनी 200वीं वनडे पारी में संयुक्त रूप से तीसरे सबसे तेज़ 8000 रन बनाने वाले खिलाड़ी बन गए हैं. उन्होंने यह उपलब्धि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांचवें वनडे में 46 रन बनाकर हासिल की और पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के रिकॉर्ड की बराबरी की.

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6 लाख करोड़ का पूंजीकरण छूने वाली तीसरी भारतीय कंपनी बनी एचडीएफसी बैंक

एचडीएफसी बैंक 13 मार्च 2019 को 6 लाख करोड़ रुपये के बाज़ार पूंजीकरण को पार करने वाली तीसरी भारतीय कंपनी बन गई. पिछले एक साल में बैंक के शेयरों में करीब 20% की तेज़ी आई है.

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दक्षिण कोरियाई ने वायु प्रदूषण का सामना करने के लिए कई बिल पास किए

दक्षिण कोरियाई सरकार ने वायु प्रदूषण का सामना करने के लिए कई बिल पास किए हैं जिनमें प्रदूषण को सामाजिक आपदा के तौर पर स्वीकारा गया है. इसके बाद, सरकार प्रदूषण से लड़ने के लिए आपातकालीन फंड इस्तेमाल कर सकती है.

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चीन ने मसूद अज़हर को ग्लोबल आतंकी घोषित होने से बचाया

चीन ने लगातार चौथी बार आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अज़हर को ग्लोबल आतंकी (Global Terrorist) घोषित होने से बचा लिया है. चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में इस प्रस्ताव के विरोध में अपने वीटो पावर (Veto Power) का इस्तेमाल कर ऐसा किया.

पुलवामा हमले के बाद तीन महाशक्तियों फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन द्वारा मसूद अज़हर के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में लाए गए प्रस्ताव के खिलाफ चीन ने वीटो लगा दिया. इसके साथ ही यह प्रस्ताव रद्द हो गया. पिछले दस साल में यह चौथा मौका है, जब चीन ने मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित होने से बचाया है.


पुलवामा हमला
पुलवामा   (जम्मू-कश्मीर) में 14 फरवरी 2019 को जम्मू से सड़क मार्ग से श्रीनगर आ रहे सीआरपीएफ जवानों   के काफिले पर आतंकी हमला हुआ था और 44 जवान शहीद हो गए थे. बतौर रिपोर्ट्स, सीआरपीएफ के करीब   70 वाहनों का काफिला   2547 जवानों को लेकर   जा रहा था और उससे टकराने वाली एसयूवी में 350 किलोग्राम आईईडी विस्फोटक था. रिपोर्ट के अनुसार   उरी के बाद यह सबसे बड़ा आतंकी हमला है. बता दें कि यह हमला श्रीनगर से सिर्फ 20 किलोमीटर की दूरी   पर हुआ है.

इनमें से अधिकतर   सीआरपीएफ जवान अपनी छुट्टियां बिताने के बाद अपनी ड्यूटी पर लौट रहे थे. जम्मू   कश्मीर राजमार्ग पर अवंतिपोरा इलाके में लाटूमोड पर इस काफिले पर अपराह्न करीब   साढ़े तीन बजे घात लगाकर हमला किया गया.

प्रस्ताव 27 फरवरी को पेश:
मसूद अज़हर पर पाबंदी का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 अलकायदा पाबंदी समिति के समक्ष 27 फरवरी 2019 को पेश किया गया था. जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले में लगभग 44 सुरक्षाकर्मियों की हत्या के बाद अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने यह प्रस्ताव पेश किया था. इसी आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव शीर्ष पर पहुंच गया था.

संयुक्त राष्ट्र की 1267 समिति क्या है?
आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड द लेवांत (आईएसआईएल) और अलकायदा प्रतिबंध समिति या 1267 प्रतिबंध समिति संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रतिबंधों के मानकों की देखरेख करती है. निर्धारित लिस्टिंग के मानदंडों को पूरा करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को नामित करती है. प्रतिबंधों से छूट के लिए सूचनाओं और अनुरोधों पर भी विचार करती है.

यह हथियारों के आयात पर प्रतिबंध, यात्रा पर प्रतिबंध, संपत्ति जब्त करने जैसे फैसले लेती है. हर 18 महीने में इसकी समीक्षा भी की जाती है. समिति अब तक 257 लोगों और 81 संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा चुकी है.

भारत, चीन के रवयै से निराशा:
चीन द्वारा वीटो करने पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने निराशा प्रकट की है. मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि हम भारत के नागरिकों पर हमले में लिप्त आतंकियों को न्याय के दायरे में लाने के सारे उपलब्ध विकल्पों का उपयोग करते रहेंगे.

स्थायी सदस्यों को हासिल है वीटो शक्ति:
दरअसल, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस के साथ चीन को वीटो की ताकत हासिल है. इनमें से अगर कोई भी देश किसी प्रस्ताव के खिलाफ वीटो लगा देता है तो वह प्रस्ताव खारिज हो जाता है.

वीटो शक्ति क्या है?
अगर सुरक्षा परिसद में   कोई प्रस्ताव आता है और अगर कोई एक स्थायी सदस्य देश इससे सहमत नहीं है तो ये   प्रस्ताव पास नहीं होगा या अमल में नहीं आएगा दूसरे शब्दों में कहे तो किसी भी   प्रस्ताव को अगर सुरक्षा परिषद में पास होना है तो उसके पांच स्थायी सदस्य की   सर्वसम्मत्ति जरूरी है अगर कोई एक देश भी विरोध करते हुए इसके खिलाप वोट करता है   तो ये वीटो कहलाता है.

चीन ने कब-कब लगाया अड़ंगा:
भारत ने सबसे पहले वर्ष 2009 में मसूद अज़हर के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया था. इसके बाद उसने वर्ष 2016 फिर प्रस्ताव रखा. चीन ने पहले मार्च 2016 ओर फिर अक्टूबर 2016 में भारत की कोशिशों को नाकाम कर दिया. वर्ष 2017 में अमेरिका ने ब्रिटेन और फ्रांस की मदद से प्रस्ताव रखा लेकिन इस में चीन ने वीटो लगा दिया.

एशिया-प्रशांत पर असर:
चीन का यह तौर तरीका एशिया प्रशांत क्षेत्र में हो रहे कूटनीतिक और रणनीतिक बदलावों पर भी गहरा असर डालेगा. इसकी कारण यह है कि अब यह मामला सिर्फ भारत और पाकिस्तान के बीच नहीं रह गया है बल्कि आतंकवाद से त्रस्त अमेरिका समेत दूसरे देश भी मसूद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने को लेकर कड़े तेवर अपनाए हुए थे. अमेरिका ने 13 मार्च को चीन की तरफ इशारा करते हुए यहां तक कहा कि मसूद अज़हर पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश कामयाब नहीं हुई तो इससे क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान पहुंचेगा.

गौरतलब है कि अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति से मौलाना मसूद अज़हर पर हर तरह के प्रतिबंध लगाने की मांग की थी. इस प्रस्ताव में कहा गया था कि आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अज़हर पर हथियारों के व्यापार और वैश्विक यात्रा से जुड़े प्रतिबंध लगाने के साथ उसकी परिसंपत्तियां भी ज़ब्त की जाएं.

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RAO और भारतीय सेना के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास

इंडो ओमान संयुक्त सैन्य अभ्यास अल नागाह III 2019, रॉयल आर्मी ऑफ़ ओमान (RAO) और भारतीय सेना के बीच एक संयुक्त सैन्य अभ्यास है. जो आज सुबह एचक्यू जबल रेजिमेंट, निजवा, ओमान में शुरू हुआ है.

उद्घाटन समारोह में ओमानी और भारतीय सैनिकों के साथ दोनों देशों के राष्ट्रीय झंडों को देखने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग, तालमेल और समझ को दर्शाया गया है.

ओमान की राजधानी: मस्कट, मुद्रा: ओमानी रियाल

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हल्दी को भौगोलिक संकेतक मिला

तमिलनाडु के दक्षिणी-पश्चिमी भाग में अवस्थित इरोड जिले (पुराना नाम पेरियार) में उत्पादित हल्दी को भौगोलिक संकेतक या पहचान (GI)  का टैग मिला है.

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जीव वैज्ञानिकों ने 103 नई प्रजातियों की खोज की

जीव वैज्ञानिकों ने इंडोनेशिया के एक द्वीप में बीटल्स (Beetles) की 103 नई प्रजातियों की खोज की है. इनके नाम जीव विज्ञानियों और ग्रीक पौराणिक पात्रों के नाम पर तो रखे ही गए हैं, साथ ही इनमें से एक का नाम स्टारवार्स के कैरेक्टर ‘योडा’ के नाम पर रखा गया है.

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भारतीय शोधकर्ताओं ने दक्षिण-पश्चिम घाट पर मेंढक की नई प्रजाति की खोज की

भारतीय शोधकर्ताओं की टीम द्वारा हाल ही में दक्षिण-पश्चिम घाट पर मेंढक की नई प्रजाति की खोज की गई है. इस संबंध में एक अध्ययन रिपोर्ट PeerJ नामक साइंस जर्नल में प्रकाशित हुई है. खोजकर्ताओं द्वारा पश्चिमी घाट में रेंगने वाले और उभयचर जीवों की विविधता को उजागर करने के लिए एक विस्तृत सर्वेक्षण किया गया जिसमें मेंढक की इस प्रजाति के नमूने पाए गए हैं. 

इस शोध को इंडियन साइंस इंस्टिट्यूट, बेंगलुरु, फ्लोरिडा नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम, जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, पुणे तथा जॉर्ज वॉशिंगटन विश्वविद्यालय, अमेरिका द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया. इस सर्वेक्षण में पश्चिम घाट के विभिन्न ऊंचाई वाले स्थानों, अलग-अलग वर्षा क्षेत्रों, विविध प्रकार के आवासों में रहने वाले सरीसृपों और अन्य रेंगने वाले जीवों को शामिल किया गया था.

एस्ट्रोबाट्राचस कुरिचियाना: मेंढक की नई प्रजाति
एस्ट्रोबाट्राचस कुरिचियाना प्रजाति के इस मेंढक की पीठ पर काले धब्बों जैसी संरचना होती है. शोधकर्ताओं ने पाया है कि खतरे की स्थिति में नर मेंढक अपनी पीठ को उठाकर इन धब्बों को प्रदर्शित करते हैं. यह धब्बे इस प्रजाति के मेंढक के लिए रक्षात्मक भूमिका   निभाते हैं. यह भी पाया गया कि यह मेंढक कीट-पतंगों जैसी आवाज़ निकालकर मादा मेंढक को पुकारते हैं.   उथले पानी के पोखर के आसपास घास की पत्तियों के नीचे की आमतौर पर नर मेंढक को देखा जाता है. शोधकर्ताओं का मानना है कि ज्यादातर समय यह मेंढक छिपे रहते हैं और केवल प्रजनन केलिए ही बाहर निकलते हैं, इसलिए इन्हें पहले बहुत कम देखा गया है.

वैज्ञानिकों द्वारा किये गये शोध से पता चला है कि इस नई प्रजाति के पूर्वज जैविक विकास के क्रम में लगभग 6-7 करोड़ साल   पूर्व अलग हो गए थे. यह प्रजाति भारत में खोजी गई है, लेकिन इसके रूप एवं आकृति (विशेषकर त्रिकोणीय अंगुली और पैर की अंगुली की   युक्तियां) दक्षिण अमेरिकी और अफ्रीका के मेंढकों जैसी दिखती हैं.

शोध के प्रमुख बिंदु
•    इस प्रजाति को एस्ट्रोबाट्राचस कुरिचियाना नाम दिया गया है और इसे नए एस्ट्रोबैट्राकिन परिवार के तहत रखा गया है.
•    इसकी करीबी प्रजातियां लगभग दो हजार किलोमीटर दूर दक्षिण-पूर्व एशिया के भारत-बर्मा और सुंडालैंड के वैश्विक जैव विविधता क्षेत्रों में पाई जाती हैं. 
•    वैज्ञानिकों के अनुसार, मेंढक की यह प्रजाति अपने दक्षिण-पूर्व एशियाई संबंधियों से लगभग चार करोड़ वर्ष पूर्व अलग हो गई थी.
•    प्रायद्वीपीय भारत के प्रमुख जैव विविधता केंद्र में स्थित होने के बावजूद इस प्रजाति की ओर पहले किसी का ध्यान नहीं गया था। स्पष्ट है कि इस क्षेत्र में उभयचरों का दस्तावेजीकरण अभी पूरा नहीं हुआ है। इस मेंढक को अब तक शायद इसलिए नहीं देखा जा सका क्योंकि यह वर्ष के अधिकतर समय गुप्त जीवनशैली जीता है और प्रजनन के लिए बेहद कम समय के लिए बाहर निकलता है.
•    पश्चिमी घाट में पाए जाने वाले निक्टीबैट्राकिने और श्रीलंका के लैंकैनेक्टिने मेंढक इस नई प्रजाति के करीबी संबंधियों में शामिल हैं. निक्टीबैट्राकिने प्रजाति का संबंध निक्टीबैट्राकस वंश से है, जबकि लैंकैनेस्टिने मेंढक लैंकैनेक्टेस वंश से संबंधित है.

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ब्रिटेन ने स्टीफन हॉकिंग के सम्मान में ‘ब्लैक होल कॉइन’ जारी किया

विश्व के प्रसिद्ध वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग के सम्मान में रॉयल मिंट ने 50 पेंस का एक नया सिक्का जारी किया है. इस सिक्के को ‘ब्लैक होल सिक्का’ नाम दिया गया है. यह सिक्का स्टीफन हॉकिंग की रिसर्च से प्रभावित है.

इस सिक्के का अनावरण स्टीफन हॉकिंग की बेटी लूसी हॉकिंग एवं बेटे टिम हॉकिंग द्वारा किया गया. रॉयल मिंट द्वारा इससे पहले, आइज़ैक न्यूटन और चार्ल्स डार्विन के सम्मान में भी सिक्का जारी हो चुका है.

ब्लैक होल सिक्का
50 पेंस के इस सिक्के की सतह पर वृत्ताकार   रेखाएं उकेरित हैं जिसके ऊपर स्टीफन हॉकिंग का नाम उकेरा गया है. इस नाम के नीचे   सिक्के में 2डी इमेज के माध्यम से ब्लैक होल को दर्शाया गया है. इस सिक्के पर हॉकिंग के ब्लैक होल फ़ॉर्मूले को भी अंकित किया गया है.

स्टीफन हॉकिंग के बारे में जानकारी
•    स्टीफन हॉकिंग को आइजैक न्यूटन और एल्बर्ट आइंस्टाइन के समतुल्य वैज्ञानिक माना जाता है. 
•    स्टीफ़न हॉकिंग का जन्म 08 जनवरी 1942 को फ्रेंक और इसाबेल हॉकिंग के घर में हुआ. 
•    स्टीफन हॉकिंग जब 21 वर्ष के थे तो उन्हें मोटर न्यूरॉन नाम की बीमारी हो गई जिससे वे जीवनभर ग्रस्त रहे.
•    उनका निधन 13 मार्च 2018 को हुआ, उस समय वे 76 वर्ष के थे.
•    उन्होंने हॉकिंग रेडिएशन, पेनरोज-हॉकिंग थियोरम्स, बेकेस्टीन-हॉकिंग फॉर्मूला, हॉकिंग एनर्जी समेत कई अहम सिद्धांत दुनिया को दिए. 
•    स्टीफन हॉकिंग ने ब्लैक होल और बिग बैंग सिद्धांत को समझने में अहम भूमिका निभाई है. 
•    उन्होंने अपनी रिसर्च से यह साबित किया कि ब्लैक होल से भी रेडिएशन तरंगें निकलती हैं. इससे पहले माना जाता था कि गुरुत्वाकर्षण के कारण ब्लैक होल से कुछ भी बाहर नहीं आता है. इसलिए इस सिद्धांत को हॉकिंग रेडिएशन थ्योरी के नाम से जाना जाता है. 
•    ब्रह्मांड पर उनकी लिखी किताब ‘ अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’  विश्व की सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकों में से एक है. 
•    हॉकिंग का आईक्यू 160 माना जाता था जो किसी भी विद्वान से कहीं ज्यादा है. 
•    ”वर्ष 2014 में उनकी जिंदगी पर फिल्म ‘ थ्योरी ऑफ एवरीथिंग’ भी बनाई जा चुकी है.

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14 मार्च को विश्व किडनी दिवस मनाया

विश्व किडनी दिवस सम्पूर्ण विश्व में 14 मार्च 2019 को मनाया गया. विश्व किडनी दिवस प्रतिवर्ष मार्च के दूसरे बृहस्पतिवार को मनाया जाता है. यह दिन वैश्विक स्वास्थ्य के प्रति एक जागरूकता अभियान है जो विश्व भर में किडनी के महत्व और किडनी की बीमारी तथा उससे संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के प्रभाव और आवृत्ति को कम करने पर केंद्रित है.

गुर्दा या किडनी रोग को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित होता है. बचाव के लिए नियमित जांच और जीवनशैली जरूरी है. लेकिन जागरूकता जरूरी है. साथ ही लोगों को किडनी प्रर्त्यपण के लिए जागरूक करना भी अहम है. जागरूकता नहीं होने से आम लोग किडनी दान करने से बचते हैं.

विश्व किडनी दिवस क्यों मनाया जाता है?
विश्व किडनी दिवस हमारे समग्र स्वास्थ्य के लिए हमारे किडनी के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने और किडनी   की बीमारी और दुनिया भर में इससे संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के प्रभाव को कम   करने के लिए मनाया जाता है.

विश्व किडनी दिवस 2019 का विषय ‘Kidney Health for   Everyone Everywhere’ है.

विश्व किडनी दिवस (World Kidney Day):
पहली बार विश्व किडनी दिवस वर्ष 2006 में शुरू किया था. यह इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ़ नेफ्रोलोजी (International Society of Nephrology) और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ़ किडनी फाउंडेशन (International Federation of Kidney Foundations) की एक संयुक्त पहल थी.

नेफ्रोलॉजी इंटरनेशनल सोसायटी (ISN):
नेफ्रोलॉजी इंटरनेशनल सोसायटी एक गैर लाभकारी सोसाइटी है जो 126 देशों में किडनी रोगों के निदान, उपचार और रोकथाम को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित है. सोसाइटी ने 2010 में अपनी 50 वीं वर्षगांठ मनाई.

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ़ किडनी फाउंडेशन (IFKF):
इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ़ किडनी फाउंडेशन एक गैर लाभकारी महासंघ है जिसकी स्थापना वर्ष 1999 में की गई. वर्तमान में 41 देशों में इसके 63 किडनी फाउंडेशन और रोगी समूह सदस्य हैं. IFKF दुनिया भर में किडनी की बीमारी के बजाय सभी को स्वास्थ्य, समृद्धि और गुणवत्तापूर्ण जीवन जीने की वकालत करता है.

लगभग 850 मिलियन लोग को किडनी की बीमारी:
किडनी की बीमारी के शिकार लोग दुनिया भर में लगभग 850 मिलियन लोग अलग-अलग कारणों से किडनी की बीमारी के शिकार हैं. खबरों के अनुसार क्रोनिक किडनी रोग हर साल कम से कम 2.4 मिलियन लोगों की मौतों का कारण बन रहा है. किडनी के रोगों से बचने के लिए इस ओर तत्काल ध्यान देने और लोगों को अधिक से अधिक जागरूक करने की जरूरत है.

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