14 Jun, 2019

केंद्र सरकार ने देश में सभी लोगों के लिए 2024 तक स्वच्छ पेयजल प्रदान करवाने का लक्ष्य निर्धारित किया

केंद्र सरकार ने 2024 तक देश में सभी लोगों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा प्रदान करने का लक्ष्य रखा है। 2024 तक 100% घरों को पाइप के द्वारा पेयजल मुहैया करवाया जायेगा। भारत में पिछले कुछ समय पर प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता में कमी आई है। 1950 में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता 5,000 लीटर थी, अब यह कम होकर 1400 लीटर ही रह गयी है। 1950 के बाद जनसख्या में तीन गुना इजाफा हुआ है जबकि जल की उपलब्धता कमी आई है। 2014 में नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बनीं सरकार ने मिशन स्वच्छ गंगा को पर्यावरण व वन मंत्रालय से अलग करके जल संसाधन में शामिल किया था। 2019 लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जल सम्बन्धी मुद्दों के लिए एकीकृत मंत्रालय के निर्माण का वादा किया था। उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता 5% से भी कम है। सिक्किम देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ पर 99% घरों में नल के द्वारा पानी पहुँचाया गया है।

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RBI ने एटीएम शुल्क की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया

एटीएम पर लगने वाले शुल्क पर गौर करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को एक समिति का गठन कर दिया है। यह समिति इस बात पर चर्चा करेगी कि क्या एटीएम पर लगने वाले शुल्क को पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है या नहीं। केंद्रीय बैंक ने छह लोगों को इसका सदस्य बनाया है।
इस उद्देश्य हेतु गठित उच्च-स्तरीय समिति की अध्यक्षता IBA के मुख्य कार्यकारी वीजी कन्नन करेंगे। इस समिति के अन्य सदस्य हैं : दिलीप अस्बे (भारतीय राष्ट्रीय भुगतान कारपोरेशन के सीईओ), गिरी कुमार नायर (भारतीय स्टेट बैंक के CGM), संजीव पटेल (टाटा कम्युनिकेशन पेमेंट्स सोल्यूशंस के सीईओ), एस. संपत कुमार (HDFC बैंक के लायबिलिटी उत्पाद के ग्रुप हेड) तथा के. श्रीनिवास (एटीएम उद्योग महासंघ के डायरेक्टर) । समिति अपनी पहली बैठक के दो महीने बाद अपनी रिपोर्ट देगी। आरबीआई ने कहा है कि समिति द्वारा रिपोर्ट जमा करने के बाद ही बैंक एटीएम शुल्क पर फैसला लेगा। छह जून को आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान इस बात का एलान किया था। हाल में जारी आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार 2011 के बाद से पिछले दो वित्तीय वर्ष में ही एटीएम की संख्या घटी है, इससे पहले लगातार नए एटीएम लगाए जा रहे थे।
आरबीआई के अनुसार, 2011 में जहां देश में कुल एटीएम की संख्या 75 हजार 600 थी, वहीं 2017 में यह बढ़कर 2 लाख 22 हजार 500 हो गई। हालांकि, इसके बाद पिछले दो वित्तीय वर्षों में एटीएम की संख्या लगातार घट रही है और 2019 मार्च तक देश में कुल 2 लाख 21 हजार 700 एटीएम थे।

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राज्यसभा में थावरचंद गहलोत होंगे सदन के नेता

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता थावरचंद गहलोत राज्यसभा में सदन के नेता होंगे।  वह बीजेपी नेता अरुण जेटली की जगह लेंगे। गौरतलब है कि जेटली का स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा है। गहलोत सदन में पहली कुर्सी पर बैठेंगे जो चेयरमैन की सीट के दाईं ओर है। उनके बाद पीएम मोदी की सीट है। गहलोत ने पिछली सरकार में पिछड़ों, वंचित तबकों और दिव्यांगों के लिए कई योजनाओं का खाका तैयार किया था। जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार उन्हें इसी मंत्रालय का कैबिनेट मंत्री बनाया। सूत्र बताते हैं कि थावरचंद गहलोत पीएम मोदी की गुडलिस्ट में शुमार मंत्रियों में से एक हैं। भरोसे का ही प्रतीक है कि उन्हें पार्टी की ओर से गुजरात का केंद्रीय ऑब्जर्वर नियुक्त किया जा चुका है।
राज्यसभा का नेता
राज्यसभा का नेता वह व्यक्ति होता है जिसके पास कैबिनेट मंत्री तथा मनोनीत मंत्री का दर्जा प्राप्त हो। राज्यसभा का नेता राज्यसभा के पदेन अध्यक्ष (उपराष्ट्रपति) के सामने प्रथम कतार में बैठता है। गोपालास्वामी अय्यंगर राज्यसभा के पहले नेता थे।

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विश्व के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले क्रिकेटर बने विराट कोहली

फोर्ब्स की सबसे ज्यादा कमाई करने वाले लोगों की लिस्ट में भले ही किसी क्रिकेटर ने जगह ना बनाई हो, लेकिन अन्य खिलाड़ियों ने जरूर जगह बनाई है। अर्जेंटीना के फुटबॉलर लियोनेल मेसी इस लिस्ट में टॉप पर हैं। मेसी ने क्रिस्टियानो रोनाल्डो को पछाड़ दिया है। विराट कोहली इकलौते ऐसे भारतीय खिलाडी हैं जो इस लिस्ट में अपनी जगह बनाने में सफल हुए हैं। भारतीय कप्तान इस सूची में 100वें स्थान पर हैं। जून 2018 से लेकर जून 2019 तक विराट कोहली की कमाई 7 करोड़ रुपए से बढ़कर 173.5 करोड़ रुपए पहुंच गई है।
टॉप 10 सबसे अधिक कमाई करने वाले खिलाड़ी
1. लिओनेल मेसी
2. क्रिस्टियानो रोनाल्डो
3. नेमार
4. कानेलो अल्वारेज़
5. रॉजर फेडरेर
6. रसल विल्सन
7. आरोन रॉजर्स
8. लेब्रोन जेम्स
9. स्टीफ़न करी
10. केविन डूरंट

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कार्बन उत्सर्जन में 2 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई

यूनाइटेड किंगडम बेस्ड तेल व गैस कंपनी ब्रिटिश पेट्रोलियम ने हाल ही में “The BP Statistical Review of World Energy” नामक रिपोर्ट जारी की, इस रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में कार्बन उत्सर्जन में 2% की वृद्धि हुई। कार्बन बजट 2017 के मुताबिक, यह पहला मौका है जब ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन तीन सालों तक सामान्य रहने के बाद बढ़ा है. कार्बन बजट को बॉन के जलवायु सम्मेलन कॉप 23 में पेश किया गया। रिपोर्ट के प्रमुख शोधार्थी कॉरिने ली क्वेरे ने इसे बेहद ही निराशाजनक बताया है। स्टडी में कहा गया है कि कुल 41 अरब मेट्रिक टन कार्बन डाय ऑक्साइड उत्सर्जन में से 37 अरब के उत्सर्जन के लिए जीवाश्म ईंधन और उद्योग जगत जिम्मेदार हैं। उत्सर्जन में इस रिकॉर्ड बढ़त को देखते हुए, विशेषज्ञों का अनुमान है कि ग्लोबल कार्बन बजट अगले 20 से 30 सालों में समाप्त हो जायेगा। साल 1990 से विकिरण में कुल 40% की वृद्धि हुई जिससे हमारे वातावरण की सभी ग्रीनहाउस गैसों पर असर पड़ा है।
वैश्विक उर्जा मांग में 2.9% की वृद्धि हुई, इस मांग को पूरा करने के लिए अमेरिका में शेल रिज़र्व का अधिक दोहन किया गया। 2018 में नवीकरणीय  उर्जा के उपयोग में 14.5% वृद्धि हुई है। "भू-वैज्ञानिक रूप से ये वृद्धि हमारे वातावरण में भारी मात्रा में गर्मी बढ़ने जैसी है क्योंकि ये परिवर्तन सामने आने में पहले की तरह दस हज़ार साल नहीं लगेंगे। ये परिवर्तन ज़ल्दी दिखाई देंगे. हमें नहीं पता कि स्थिति क्या है? इस वजह से ये स्थिति थोड़ी चिंताजनक है।"

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भारत अगले महीने पहला 'अंतरिक्ष युद्धाभ्यास' करेगा

अंतरिक्ष में चीन को टक्कर देने और अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को और भी मजबूत करने के लिए भारत ने तैयारी कर ली है। भारत ने मार्च में एंटी-सैटलाइट (A-Sat) मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था और हाल ही में ट्राई सर्विस डिफेंस स्पेस एजेंसी की शुरुआत भी की है।  इस अभ्यास में सैन्य कार्य से सम्बंधित सभी संगठन हिस्सा लेंगे, इसमें वैज्ञानिक भी शामिल होंगे। इस अभ्यास का उद्देश्य अन्तरिक्ष युद्ध की सभी संभावित चुनौतियों से परिचित होना है। इसका उद्देश्य अन्तरिक्ष के क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभुत्व का सामना करना है जो कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। इस अभ्यास का आयोजन जुलाई के अंतिम सप्ताह में रक्षा मंत्रालय के एकीकृत रक्षा स्टाफ के तहत किया जा सका है।
IndSpaceEx का प्लान
एक अन्य अधिकारी ने इस बारे में बताया, 'भारत को स्पेस में विरोधियों पर निगरानी, संचार, मिसाइल की पूर्व चेतावनी और सटीक टारगेट लगाने जैसी चीजों की आवश्यकता है। इससे हमारे सशस्त्र बल की विश्वसनीयता बढ़ेगी और राष्ट्रीय सुरक्षा भी मजबूत होगी। ऐसे में IndSpaceEx हमें अंतरिक्ष में रणनीतिक चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा, जिन्हें संभालने की आवश्यकता है।'

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अब बूढ़े मां-बाप का ध्‍यान नहीं रखा तो जाना पड़ेगा जेल

बिहार में अब अपने बूढे माता-पिता की सेवा नहीं करने पर जेल भी जानी पड़ सकती है। बिहार मंत्रिमंडल की मंगलवार को हुई बैठक में फैसला किया गया कि बिहार में रहने वाली संतानें अगर अब माता-पिता की सेवा नहीं करेंगी तो उन्हें जेल की सजा हो सकती है। अगर किसी के मां-बाप इसकी शिकायत करते हैं कि उनकी संतान सेवा नहीं करती तो ऐसे बच्चों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार ने माना है कि ऐसे मां-बाप जिनके बच्चे उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं। उनको कानूनी संरक्षण प्रदान करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
बेटे-बेटियों और निकट संबंधियों से प्रताड़ित होनेवाले बुजुर्ग अपनी प्रताड़ना को लेकर अब डीएम के पास न केवल अपील कर सकेंगे बल्कि प्रताड़ना झेल रहे माता-पिता को अब अपनी शिकायत के लिए परिवार न्यायालय जाने की जरूरत भी नहीं रही है। बच्चों की प्रताड़ना झेल रहे बुजुर्गों को न्याय के लिए फैमिली कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ता था। लेकिन अब यह मामला डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट भी सुलझा सकते हैं।

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नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार के पुत्र प्रशांत कुमार को ओला का निदेशक बनाया

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार के पुत्र प्रशांत कुमार ने हाल ही में बतौर निदेशक (पब्लिक पॉलिसी) ओला ज्वाइन किया है। इससे पहले वह सितंबर 2018 से लेकर मई 2019 तक अमेरिका-भारत रणनीतिक मंच के मुंबई में प्रमुख थे। सूत्रों ने बताया कि कुमार ने यूनिवर्सिटी ऑफ ससेक्स से ग्लोबल पॉलिटिकल इकॉनोमी में मास्टर डिग्री हासिल किया है। वह ओला के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के प्रमुख आनंद शाह के संपर्क में काम करेंगे। कुमार ऐसे समय में ओला से जुड़े हैं जब सरकार की योजना है कि उबर और ओला समेत टैक्सी समूह अपने बेड़े में 40 फीसदी कारों को 2026 तक बिजली चालित वाहनों में बदलें। नीति आयोग ने निश्चित समयावधि के भीतर विभिन्न प्रकार के वाहनों की जगह बिजली चालित वाहन लाने का आह्वान करते हुए एक प्रस्ताव दिया है।

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केंद्र सरकार ने Direct Benefit Transfer ट्राइबल वेब पोर्टल लांच किया

केन्द्रीय जनजातीय मामले मंत्रालय ने हाल ही में DBT (Direct Benefit Transfer) ट्राइबल वेब पोर्टल लांच किया, इसका उद्देश्य लाभार्थी छात्रों को छात्रवृत्ति जारी करके राशि को सीधे उनके बैंक खाते में हस्तांतरित करना है।
इस पोर्टल के माध्यम से राज्यों को एकल प्लेटफार्म मिलेगा जहाँ पर लाभार्थियों का डाटा अपलोड किया जा सकती है। इस पोर्टल पर पूछताछ भी की जा सकती है तथा फीडबैक भी दी जा सकती है। इस पोर्टल में लाभार्थी के डाटा संग्रहण के लिए 29 कॉलम हैं। यह पोर्टल आधार तथा सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली से जुड़ा हुआ है, इससे नकली प्रविष्ठियां नहीं की जा सकेंगी। इस पोर्टल में सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा डाटा अपलोड किया जाना अनिवार्य है। इससे केंद्र सरकार को जानकारी मिल सकेगी कि किस राज्य, जिले ब्लाक अथवा स्कूल लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ मिल रहा है। 
इनमे से कुछ प्रमुख योजनायें निम्नलिखित हैं :
दो प्रमुख छात्रवृत्ति योजनायें : यह दो योजनायें हैं : प्री-मेट्रिक तथा पोस्ट-मेट्रिक शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति। इनका क्रियान्वयन राज्यों के माध्यम से किया जाता है।
उच्च शिक्षा : उच्च शिक्षा के लिए 246 प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे IIT, आईआईएम इत्यादि में “टॉप क्लास एजुकेशन फॉर एस.टी. स्टूडेंट्स” योजना चलायी जा रही है, इससे प्रतिवर्ष लगभग 1000 छात्र लाभान्वित होते हैं।
एम.फिल व पीएचडी कार्यक्रम : केंद्र सरकार 750 लाभार्थियों के लिए राष्ट्रीय फ़ेलोशिप योजना चला रही है।
विदेश में शिक्षा : जो जनजातीय छात्र विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने चाहते हैं, उनके लिए भी केंद्र सरकार द्वारा छात्रवृत्ति योजना चलायी जा रही है, इस योजना का लाभ प्रतिवर्ष 30 छात्र उठा सकते हैं।
कुल लाभार्थी : पिछले पांच वर्षों में उपरोक्त पांच योजनाओं से अब तक 1.58 करोड़ लाभार्थियों को 31 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेश में 7,900 करोड़ रुपये आबंटित किये जा चुके हैं।

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भारतीय वायुसेना के लापता एएन-32 विमान का मलबा मिला

भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के लापता एएन-32 (AN-32) विमान का मलबा मिल गया है। मलबा अरुणाचल प्रदेश के सियांग जिले में मिला है। एएन-32 विमान पर सवार सभी 13 सैन्यकर्मियों की मौत हो गई है। एयर फ़ोर्स के इस विमान ने तीन जून को असम के जोरहाट से उड़ान भरी थी लेकिन कुछ ही देर बाद संपर्क टूट गया था। विमान में सवार 13 लोगों की तलाश के लिए भारतीय वायु सेना के 8-10 जवानों को दो हेलीकॉप्टर की सहायता से क्रैश साइट पर सफलतापूर्वक एयरड्रॉप किया गया है। इस टीम में भारतीय वायु सेना, थल सेना और सामान्य पर्वतारोहियों शामिल हैं। मलबा घने जंगलों वाले इलाके में पाया गया है। दुर्गम पहाड़ी इलाके में मिले विमान के मलबे की जो तस्वीरें सामने आई हैं, उनमें मलबा बिखरा हुआ दिख रहा है, आसपास के पेड़ जले हुए दिख रहे हैं। आशंका है कि विमान के क्रेश होने के बाद इन पेड़ों में आग लगी होगी। विमान का मलबा जिस स्थान पर मिला है वह अरुणाचल प्रदेश में एएन-32 के उड़ान मार्ग से करीब 15-20 किलोमीटर उत्तर की ओर है। ये जगह चीनी सीमा के बेहद नजदीक है। वायु सेना के वरिष्ठ से लेकर जूनियर अफ़सर तक इस लापता विमान को बहुत ही शक्तिशाली, वायुसेना परिवहन की रीढ़ और ऐसा मज़बूत विमान बताते हैं जो छोटे और अस्थायी रनवे पर भी उतर सकता है। रख-रखाव के नज़रिए से भी देखा जाए तो एएन32 की बहुत मांग है।

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