09 Mar, 2019

एड्स नियंत्रण कार्यक्रम को 2020 तक जारी रखने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 6434 करोड़ रुपये मंजूर किए

देश में संक्रामक रोग एड्स की रोकथाम में मिली सफलता को देखते हुए एड्स नियंत्रण कार्यक्रम को 2020 तक जारी रखने तथा इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा 6434 करोड़ रुपये मंजूर करने का निर्णय लिया गया है.

The Hindu

ममता बेनर्जी ने ‘युवाश्री अर्पण’ योजना की घोषणा की

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी द्वारा हाल ही में ‘युवाश्री अर्पण’ योजना की घोषणा की गई. इस योजना के तहत राज्य के 50 हजार युवाओं को सरकार की ओर से निजी उद्यम शुरू करने के लिए एक-एक लाख रुपए की धनराशि दी जाएगी.

The Hindu

कीरू पनबिजली परियोजना के निर्माण के लिए मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने जम्मू-कश्मीर में मेसर्स चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कीरू पनबिजली परियोजना (624 मेगावाट) के निर्माण के लिए निवेश करने को मंजूरी दे दी है.

The Hindu

जापानी आर्किटेक्ट अराता इसोजाकी को प्रतिष्ठित प्रित्जकर पुरस्कार-2019 के लिए चयनित किया

जापानी आर्किटेक्ट अराता इसोजाकी को प्रतिष्ठित प्रित्जकर पुरस्कार-2019 के लिए चयनित किया गया है. वे इस पुरस्कार को जीतने वाले 46वें व्यक्ति तथा आठवें जापानी आर्किटेक्ट हैं. 

The Hindu

भारत ने रूस के साथ तीन अरब डॉलर का समझौता किया

भारत ने 10 साल की अवधि के लिए भारतीय नौसेना के लिए परमाणु क्षमता से संपन्न हमलावर पनडुब्बी पट्टे पर लेने के लिए रूस के साथ तीन अरब डॉलर का समझौता किया है.

The Hindu

अनंत अंबानी को बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति का सदस्य नियुक्त किया

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उद्योगपति मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत अंबानी को बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति का सदस्य नियुक्त किया है. इन मंदिरों का प्रबंधन और प्रशासन यह समिति ही संभालती है.

The Hindu

अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजा

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को मध्यस्थता के लिए भेज दिया है. एक हफ्ते के भीतर मध्यस्थता की प्रक्रिया को शुरू किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए तीन सदस्यों का पैनल गठित किया है, जिसके अध्यक्ष जस्टिस खलीफुल्ला होंगे. इसके अलावा श्री श्री रविशंकर और श्रीराम पंचु भी पैनल में शामिल हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले की रिपोर्टिंग न की जाए.कोर्ट ने कहा है कि मध्यस्थता करने वाले तीन सदस्यीय पैनल को 4 हफ्तों में अपनी शुरुआती रिपोर्ट देनी होगी और 8 हफ्तों में अपनी पूरी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपनी होगी. कार्रवाही फैजाबाद (अयोध्या) में होगी और गोपनीय होगी. 06 मार्च 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया था.

मध्यस्थता के लिए बने पैनल में मौजूद ये तीन लोग कौन हैं?
जस्टिस खलीफुल्ला: इस पैनल के चेयरमैन जस्टिस फकीर मोहम्मद इब्राहिम खलीफुल्ला हैं. तमिलनाडु के रहने वाले जस्टिस खलीफुल्ला सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज हैं. जस्टिस खलीफुल्लाह ने 1975 में पहली बार वकालत शुरू की थी. साल 2000 में खलीफुल्ला मद्रास हाई कोर्ट के जज के रूप में नियुक्त किए गए. उसके बाद 2011 में, वह जम्मू और कश्मीर के हाई कोर्ट के सदस्य बने और उन्हें दो महीने बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया.

श्री श्री रवि शंकर: सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए श्री श्री रविशंकर का नाम भी दिया है. श्री श्री रविशंकर आध्यात्मिक गुरु है. उनकी संस्था का नाम आर्ट ऑफ लिविंग है.

श्रीराम पंचू: श्रीराम पंचू एक सीनियर वकील है और जाने माने मध्यस्थ हैं. वह द मेडिएशन चेम्बर्स के संस्थापक हैं, जो मध्यस्थता की सेवाएं देता है. इसके अलावा वो भारतीय मध्यस्थों के संघ के अध्यक्ष और अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता संस्थान (IMI) के बोर्ड में डायरेक्टर हैं. उन्होंने 2005 में भारत का पहला कोर्ट-एनेक्स मध्यस्थता सेंटर बनाया था. उन्होंने मध्यस्थता को भारत की कानूनी प्रणाली का हिस्सा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय बेंच ने सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद मध्यस्थता के लिए नाम सुझाने को कहा था. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली पांच जजों की बेंच के सामने पिछली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि यह सही और विवेकपूर्ण नहीं होगा. उत्तर प्रदेश सहित हिंदू पक्षकारों ने भी अदालत के प्रस्ताव का विरोध किया था. राम लला की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सी.एस.वैद्यनाथन ने भी मध्यस्थता का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि भगवान राम की जन्मभूमि विश्वास व मान्यता का विषय है और वे मध्यस्थता में विरोधी विचार को आगे नहीं बढ़ा सकते.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संवैधानिक बेंच अयोध्या मामले की सुनवाई कर रही है. मामले की सुनवाई कर रही संवैधानिक बेंच में सीजेआई रंजन गोगोई के अलावा न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं. सुनवाई के दौरान जस्टिस बोबडे ने कहा है कि इस मामले में मध्यस्थता के लिए एक पैनल का गठन होना चाहिए.

इससे पहले 26 फरवरी 2018 को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अपनी निगरानी में मध्यस्थ के जरिए विवाद का समाधान निकालने पर सहमति जताई थी. कोर्ट ने कहा था कि एक फीसदी भी उम्मीद है तो मध्यस्थ के जरिए मामला सुलझाने की कोशिश होनी चाहिए.

मध्‍यस्‍थता क्या है?
मध्‍यस्‍थता (Arbitraton)   एक वैकल्पिक विवाद समाधान प्रक्रम है जिसमें   पक्षकर किसी तीसरे व्‍यक्ति के हस्‍तक्षेप के माध्‍यम से तथा न्‍यायालय का सहारा   लिए बिना अपने विवादों का निपटान करवाते हैं. यह ऐसी विधि है जिसमें विवाद किसी   नामित व्‍यक्ति के सामने रखा जाता है जो दोनों पक्षों को सुनने के पश्‍चात   अर्ध-न्‍यायिक तरीके से मसले का निर्णय करता हैं. समाधान समाधानकर्ता की सहायता से   पक्षकारों द्वारा विवादों के सौहार्दपूर्ण निपटान की प्रक्रिया है.

इससे पहले 27 सितंबर 2018 को तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 2-1 के बहुमत से 1994 के एक फैसले में की गई अपनी टिप्पणी पर नए सिरे से विचार करने के लिए मामले को पांच न्यायमूर्तियों की खंडपीठ के पास भेजने से इंकार कर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गयी है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 01 जनवरी 2019 को ही कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर के मामले में न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अध्यादेश लाने के बारे में निर्णय का सवाल उठेगा.

क्या था मामला?
इस्माइल फारूकी ने अयोध्या में भूमि अधिग्रहण को चुनौती   दी थी जिस पर सुनवाई करते हुए शीर्ष न्यायालय ने कहा था कि नमाज पढ़ना मस्जिद का   अनिवार्य हिस्सा नहीं है.

मुस्लिम समुदाय इससे सहमत नहीं था और वह चाहता था कि   सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले पर दोबारा से विचार करे.

सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्षकारों की ओर से दलील दी गई   थी कि मस्‍जिद में नमाज़ मामले पर जल्द निर्णय लिया जाए.

मुस्लिम समुदाय यह भी चाहता था कि मुख्य मामले से पहले 1994 के इस फैसले पर   सुनवाई हो. अयोध्या जमीन विवाद पर फैसला तथ्यों के आधार पर होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को इस मुद्दे पर फैसला सुरक्षित रखा था. इसके साथ   ही राम जन्मभूमि में यथास्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया गया था, ताकि हिंदू धर्म   के लोग वहां पूजा कर सकें.

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 2010 में जो फैसला दिया था उसके खिलाफ हिंदू महासभा और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. इससे पहले मामले की सुनवाई चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नज़ीर कर रहे थे.

अयोध्या विवाद कब क्या हुआ?
वर्ष
विवाद
1949
बाबरी मस्जिद के   अंदर भगवान राम की मूर्तियां देखी गई. सरकार ने परिसर को विवादित घोषित कर भीतर जाने वाले दरवाज़े   को बंद किया.

1950
फ़ैज़ाबाद अदालत   में याचिका दायर कर मस्जिद के अंदर पूजा करने की मांग की गयी.

1959
निर्मोही आखड़ा ने   याचिका दायर कर मस्जिद पर नियंत्रण की मांग की.

1961
सुन्नी वक़्फ़   बोर्ड की याचिका, मस्जिद से मूर्तियों को हटाने की मांग की गयी.

1984
वीएचपी ने राम   मंदिर हेतु जनसमर्थन जुटाने का अभियान शुरू किया.

1986
फ़ैज़ाबाद कोर्ट ने   हिंदुओं की पूजा हेतु मस्जिद के द्वार खोलने के आदेश दिए.

1989
राजीव गांधी ने   विश्व हिंदू परिषद को विवादित स्थल के क़रीब पूजा की इजाज़त दी.

1992
कारसेवकों ने   बाबरी मस्जिद गिराया और अस्थाई मंदिर का निर्माण किया.

2003
इलाहाबाद   हाइकोर्ट ने ASI को विवादित स्थल   की खुदाई का आदेश दिया.

2010
इलाहाबाद   हाइकोर्ट ने विवादित ज़मीन को तीन भाग में बांटने के आदेश दिए, अलग-अलग   पक्षकारों ने हाइकोर्ट के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी.

2011
सुप्रीम कोर्ट ने   इलाहाबाद हाई कोर्ट के फ़ैसले पर रोक लगाते हुए कहा कि सुनवाई के दौरान हाई   कोर्ट के फ़ैसले को लागू करने पर रोक रहेगी. साथ ही विवादित स्थल पर सात जनवरी 1993 वाली यथास्थिति   बहाल रहेगी.

2016
विवादित भूमि पर   राम मंदिर के निर्माण को लेकर सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका   दायर की.

2017
सुप्रीम कोर्ट के   मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर ने कहा कि अयोध्या विवाद मामले को आपसी बातचीत से   सुलझा लेना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने 1994 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के दिए गए इस्माइल फ़ारूक़ी   फ़ैसले को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के लिए तीन जजों की बेंच का गठन किया.

2018
सुप्रीम कोर्ट ने   राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद से जुड़े वर्ष 1994 वाले फ़ैसले पर पुनर्विचार से इनकार किया.

बता दें कि इससे पहले इस मामले की सुनवाई तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच कर रही थी. रिटायरमेंट से पहले चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने इस मामले पर एक फैसले में कहा था कि यह मामला जमीन विवाद का है और इसे संवैधानिक बेंच को रेफर नहीं किया जाएगा.

The Hindu

मिज़ोरम के राज्यपाल के. राजशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दिया

मिज़ोरम के राज्यपाल के. राजशेखरन ने अपने 9 महीने के कार्यकाल के बाद 08 मार्च 2019 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. फिलहाल, असम के राज्यपाल प्रोफेसर जगदीश मुखी के पास मिज़ोरम का अतिरिक्त कार्यभार होगा.

The Hindu

वित्त मंत्रालय ने कर्मचारियों की 20 लाख रुपये तक की ग्रैच्युटी टैक्स फ्री

वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) और पेमेंट ऑफ ग्रैच्युटी ऐक्ट के तहत ना आने वाले कर्मचारियों की 20 लाख रुपये तक की ग्रैच्युटी टैक्स फ्री कर दी है. इससे पहले मार्च 2018 में ग्रैच्युटी राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये की गई थी

The Hindu

मंत्रिमंडल समिति की बैठक में 660-660 मेगावाट के दो ताप विद्युत संयंत्रों को मंज़ूरी दी

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीईए) की बैठक में बक्सर (बिहार) के चौसा में 660-660 मेगावाट के दो ताप विद्युत संयंत्रों को मंज़ूरी दे दी गई. बतौर रिपोर्ट्स, 10,439.09 करोड़ रुपये की इन ताप विद्युत परियोजनाओं से उत्पादित होने वाली बिजली का 85 फीसदी हिस्सा बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड खरीदेगी.

The Hindu