06 Mar, 2019

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने “युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम” शुरू किया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने इस वर्ष से स्कूली बच्चों के लिए “युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम” (युविका) नामक एक विशेष कार्यक्रम शुरू किया है. इस कार्यक्रम का उद्देश्य मुख्य रूप से अंतरिक्ष कार्यकलापों के उभरते क्षेत्रों में अपनी रुचि जगाने के इरादे से युवाओं को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष विज्ञान और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों पर बुनियादी ज्ञान प्रदान करना है. 

युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम के मुख्य बिंदु
•    इसरो ने इस कार्यक्रम को "उन्हें कम उम्र में ही ज्ञान प्रदान करने" के लिए चुना है. 
•    आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम गर्मियों की छुट्टियों के दौरान लगभग दो सप्ताह की अवधि का होगा और प्रत्येक वर्ष इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए प्रत्येक राज्य / केंद्र शासित प्रदेश से 3 छात्रों का चयन करना प्रस्तावित है, जो सीबीएसई, आईसीएसई और राज्य पाठ्यक्रम को कवर करते हैं. 
•    जो छात्र 8 वीं कक्षा पूरी कर चुके हैं और वर्तमान में 9 वीं कक्षा में पढ़ रहे हैं, वे कार्यक्रम के लिए पात्र होंगे.
•    चयनित छात्रों को इसरो के अतिथिगृह/ हॉस्टल में ठहराया जाएगा. 
•    पूरे पाठ्यक्रम के दौरान छात्र द्वारा यात्रा (निकटतम रेवले स्टेशन से रिपोर्ट करने वाले केंद्र तक आने एवं जाने हेतु रेलगाड़ी का द्वितीय श्रेणी का किराया), पाठ्य सामग्री, रहने एवं खाने, इत्यादि में किए गए व्यय का वहन इसरो द्वारा किया जाएगा. 
•    छात्र को रिपोर्टिंग केंद्र तक लाने एवं ले जाने हेतु एक अभिभावक/माता-पिता को भी रेलगाड़ी में द्वितीय श्रेणी का किराया प्रदान किया जाएगा.
•       इसरो ने त्रिपुरा में इनक्यूबेशन केंद्र विकसित किया है. ऐसे ही चार और केंद्र को त्रिची, नागपुर, राउरकेला और इंदौर में विकसित किये जायेंगे.

चयन प्रक्रिया
इसरो ने भारत में राज्यों के संबंधित मुख्य सचिव/ केंद्र शासित प्रदेशों के संबंधित प्रशासनिकों से प्रत्येक राज्य/कें.शा.प्र. से तीन छात्रों के चयन हेतु व्यवस्था करने और उनकी सूची इसरो को प्रदान करने हेतु संपर्क किया है. चयन की प्रक्रिया शैक्षणिक प्रदर्शन एवं पाठ्यक्रम गतिविधियों पर आधारित होगी, जिसे राज्यों के मुख्य सचिवों/ कें.शा.प्र. के प्रशासनिकों को पहले से परिचालित चयन मानदंडों में स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है. चयन प्रक्रिया में ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को विशेष महत्व दिया जाएगा.

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दिल्ली विश्व की सबसे अधिक प्रदूषित राजधानी

पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर काम करने वाले संगठन आईक्यूएयर एयरविज़ुअल और ग्रीनपीस द्वारा संयुक्त रूप से किये गये अध्ययन में पाया गया है कि दिल्ली विश्व की सबसे अधिक प्रदूषित राजधानी है. जबकि, गुरुग्राम विश्व के सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में अव्वल है.
अध्ययन के आंकड़ों में बताया गया है कि वर्ष 2018 के दौरान प्रदूषण स्तर के मामले में गुरुग्राम दुनिया के सभी शहरों से आगे रहा है, हालांकि पिछले साल की तुलना में उसका स्कोर कुछ बेहतर हुआ है. शीर्ष पांच शहरों में चार शहर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा हैं, और एक शहर पाकिस्तान का है.
ग्रीनपीस रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
•    ग्रीनपीस ने 62 प्रदूषित शहरों की सूची जारी की है इनमें गुरुग्राम सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर है. एनजीओ का यह आकलन वर्ष 2018 के आंकड़ों के अनुसार है.
•    टॉप छह सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों के लिस्ट में पांच भारत के हैं जबकि एक पाकिस्तान का है. 
•    सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहरों की सूची में गुरुग्राम के बाद गाज़ियाबाद, तीसरे स्थान पर फैसलाबाद (पाकिस्तान), चौथे पायदान पर फरीदाबाद तथा पांचवें नंबर पर भिवाड़ी मौजूद हैं. सूची में छठा स्थान नोएडा का है, जबकि सातवें और नौवें पायदान पर क्रमशः पटना (बिहार) और लखनऊ (उत्तर प्रदेश) हैं. लिस्ट में आठवें स्थान पर चीन का होटन शहर है, और 10वें स्थान पर पाकिस्तान का लाहौर शहर मौजूद है. 
•    इस सूची में तीन राजधानियां शामिल हैं जिसमें से सबसे ऊपर भारत की राजधानी दिल्ली, दूसरे नंबर पर बांग्लादेश की राजधानी ढाका और तीसरे नंबर पर अफगानिस्तान की राजधानी काबुल है.
•    यह रिपोर्ट दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों के ऑनलाइन इंटरएक्टिव डिस्प्ले के साथ 2018 में कई क्षेत्रों और उप-क्षेत्रों में वायु-गुणवत्ता और काम करने की जरूरत को लेकर आंकी गई है.
•    यह रिपोर्ट एअरविजुअल प्लेटफार्म के जरिए जमा किए गए पीएम 2.5 डाटा की वायु गुणवत्ता को मापती है. इस रिपोर्ट में प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान का भी अनुमान लगाया गया है.

ग्रीनपीस के बारे में
ग्रीनपीस की स्थापना वर्ष 1971 में कनाडा में एक अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संगठन के रूप में हुई थी. यह उन सरकारी और औद्योगिक नीतियों को प्रकाश में लाने तथा परिवर्तित करने के लिये कार्यरत है, जो पर्यावरण और प्रकृति के लिये हानिकारक होते हैं. ग्रीनपीस का उद्देश्य पृथ्वी की प्रकृति को इसकी विविधता के साथ उपयोग करना है

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-रूस के आयुध कारखाने का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 03 मार्च 2019 को उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में भारत-रूस के आयुध कारखाने का उद्घाटन किया. भारत-रूस (इंडो-रशिया) राइफल प्राइवेट लिमिटेड भारत की आयुध फैक्टरी और रूस के प्रतिष्ठान का जॉइंट प्रोजेक्ट है. 
कोरवा आयुध फैक्टरी में प्रतिष्ठित कलाशनिकोव राइफलों की नवीनतम श्रेणियां बनाई जाएंगी. यह संयुक्त उद्यम देश में शस्त्र सेनाओं को मदद देगा और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती प्रदान करेगा. रूस के सहयोग से अमेठी में AK- 203 मॉर्डन राइफल बनाने का काम शुरू किया जायेगा. यहां भारतीय सेना के लिए 7.5 लाख राइफलें बनाई जायेंगी.
अमेठी में आयुध फैक्ट्री का विवरण
•    कोरवा आयुध फैक्टरी द्वारा भारतीय सेना को एके-47 राइफल का आधुनिक संस्करण AK–203 प्रदान किया जाएगा.
•    इस उत्पादन के लिए भारत ने रूस के साथ समझौता किया है. इस समझौते के अनुसार, रूस के सहयोग से भारत में 07 लाख 50 हजार (7,50,000) असॉल्ट राइफलें बनेंगी.
•    AK-203 असॉल्ट राइफलों के लिए ओएफबी और रूसी कंपनी कंसर्न क्लानिश्नकोव के बीच रक्षा सौदे पर करार हुआ है. भारत और रूस की कंपनियां मिलकर इसे बनाएंगी. 
•    भारतीय सेना की पुरानी इंसास राइफल को रिप्लेस किया जाएगा और इसकी जगह जवानों को AK-203 असॉल्ट राइफलें मिलेंगी.
AK-203 राइफल की विशेषताएं
•    यह AK सीरीज़ की सबसे आधुनिक और भरोसेमंद राइफल मानी जाती है.
•    AK-203, कंटवर्टेबल राइफल है. इसे सैमी ऑटोमेटिक और ऑटोमैटिक तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है. 
•    AK-47 सबसे बेसिक मॉडल है इसके बाद एके में 74, 56, 100 सीरीज, 200 सीरीज आ चुकी हैं.
•    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नई असॉल्ट राइफल की लंबाई करीब 3.25 फुट होगी. 
•    गोलियों से भरी राइफल का वजन लगभग 4 किलोग्राम होगा. 
•    साथ ही यह किसी भी ऑपरेशन में जवानों के लिए इजी टू हैंडल होगी. यह नाइट ऑपरेशन में भी काफी कारगर होगी.
•    एक मिनट में 600 गोलियां दागी जा सकेंगी अर्थात् एक सेकंड में दस गोलियां चलाई जा सकेंगी. इसके लिए एके-203 के गैस चैम्बर और स्प्रिंग को पहले से बेहतर किया जाएगा.
•    इसरी रेंज 400 मीटर तक होगी और नया सिपाही भी इससे अचूक निशाना लगा सकेगा.
•    AK-203 महज आठ से नौ पुर्जों से मिलकर बनी होगी और इसे मात्र एक मिनट में दोबारा संगठित किया जा सकेगा.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश निर्मित नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड का शुभारंभ किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 04 मार्च 2019 को स्वदेश निर्मित नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी) का शुभारंभ किया. लोगों को देशभर में मेट्रो सेवाओं और टोल टैक्स समेत कई तरह के परिवहन शुल्क का भुगतान करने में सक्षम बनाने के लिए यह सेवा आरंभ की गई है.
अलग-अलग परिवहन सेवाओं में इस्तेमाल किए जाने वाले ‘एक राष्ट्र एक कार्ड’ से धारक अपनी बस का किराया, टोल टैक्स, पार्किंग शुल्क, रिटेल खरीददारी कर सकेंगे और यहां तक कि पैसा भी निकाल सकेंगे.

वन नेशन, वन कार्ड की विशेषताएं
•    इस कार्ड का इस्तेमाल मेट्रो, बस, उप नगरीय रेलवे, टोल, पार्किंग, स्मार्ट सिटी और खुदरा दुकानों में भी किया जा सकेगा. 
•    पीओएस मशीन पर स्वाइप करने के साथ ही मेट्रो स्टेशनों पर मौजूद एएफसी गेट पर इस्तेमाल किया जा सकता है. 
•    इस नई पहल को ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन गेट ' स्वागत' ने डेवलप किया है जहां एक ओपन लूप ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम ' स्वीकार' का इस्तेमाल किया गया है.
•    यूजर्स इस दौरान इस कार्ड की मदद से एटीएम पर 5 प्रतिशत और दूसरे आउटलेट्स पर 10 प्रतिशत तक का कैशबैक पा सकते हैं.
•    वन नेशन वन कार्ड बिलकुल रुपे, डेबिट या क्रेडिट कार्ड की तरह ही है जिसे आपका बैंक ही जारी करता है.
•    रुपे वन नेशन कार्ड रेगुलर डेबिट और क्रेडिट कार्ड की तरह कांटैक्टलेस कार्ड होता है जो ठीक मेट्रो रेल स्मार्ट कार्ड की तरह ही है.
•    रुपे कांटैक्टलेस कार्ड नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड सपोर्ट के तहत आएगा. ये कार्ड 25 से ज्यादा बैंकों में उपलब्ध होगा जिसमें एसबीआई और पीएनबी सहित कई बड़े बैंक शामिल हैं.
•    वन नेशन वन कार्ड को पेटीएम पेमेंट्स बैंक से भी जारी किया जाएगा.
•    सिंगापुर, लंदन, पेरिस, सिडनी, पर्थ, मेलबर्न जैसे शहरों में इस तरह के कार्ड का इस्तेमाल हो रहा है.

लाभ
यह कार्ड रुपे भुगतान प्रणाली से संचालित है और इससे यात्रा में भुगतान संबंधी सभी दिक्कतें खत्म हो जायेंगी. मेट्रो, बस या ट्रेन या टोल और पार्किंग शुल्क देने के लिए नकद में भुगतान करने के लिए कैश की आवश्यकता नहीं होगी एक ही कार्ड से सभी भुगतान किये जा सकते हैं. इन सभी सेवाओं के लिए कार्ड के रूप में एक स्वचालित किराया संग्रह प्रणाली लायी गई है. आवास व शहरी विकास मंत्रालय, सीडैक व भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के सहयोग से ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम बनाया गया है जिसके चलते इसका उपयोग सुरक्षित सुनिश्चित किया गया है.

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उद्योग मंत्रालय ने पी.के. बेजबरुआ को टी बोर्ड के चेयरमैन नियुक्त किया

केन्द्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय ने हाल ही पी.के. बेजबरुआ को पुनः टी बोर्ड के चेयरमैन नियुक्त किये जाने को मंज़ूरी दी. वे टी बोर्ड के पहले गैर-आईएएस चेयरमैन हैं.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना' का शुभारंभ किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 05 मार्च 2019 को गुजरात के गांधीनगर से 'प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना' का शुभारंभ किया. असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और मजदूरों के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना की घोषणा फरवरी 2019 में अंतरिम बजट में की गई थी.
इस योजना के तहत 60 वर्ष की आयु के बाद असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को 3000 रुपये की मासिक पेंशन प्रदान करने का प्रावधान है. योजना से असंगठित क्षेत्र के 10 करोड़ श्रमिकों को लाभ मिलेगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना' का शुभारंभ कर 11,51,000 लाभार्थियों तक 13,58,31,918 रुपये की धनराशि सीधे पेंशन खातों में ट्रांसफर की.

योजना के लाभार्थी:
रिक्शा-ठेला चलाने वाले, फेरी लगा कर सामान बेचने वाले, दिहाड़ी मजदूरी करने वाले, घरों में काम करने वाली जैसे असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को 60 साल के बाद 3000 रुपये की मासिक पेंशन देने की योजना है.

योजना से संबंधित खास बातें:
•   श्रम मंत्रालय के मुताबिक 18 साल से 40 साल तक के कामगार इस योजना के लिए रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं.
•   60 साल की उम्र पूरी होने के बाद रजिस्टर्ड व्यक्ति को तीन हजार रुपए की पेंशन हर महीने मिलेगी.
•   इस योजना का फायदा ऐसे मजदूरों को मिलेगा जिनकी मासिक आमदनी 15 हजार रुपये से कम है. यानी, ऐसे लोग जो मासिक आधार पर 15 हजार से कम कमा पाते हैं, उनको इस दायरे में लाया जाएगा.
•   अगर कोई 18 साल की उम्र में इससे जुड़ता है तो उसे हर महीने सिर्फ 55 रुपए जमा करते हैं वहीं 40 साल के व्यक्ति को हर महीने 200 रुपए की रकम जमा करनी होगी. 29 साल की उम्र वाले को इस योजना से जुड़ने के लिए 100 रुपए प्रति महिना जमा करवाने होंगे. यह रकम 60 साल की उम्र तक देनी है.
•   इनमें मजदूरों को हर महीने एक निश्चित राशि का प्रीमियम देना होगा. जितना प्रीमियम होगा, उतने रुपये की सब्सिडी सरकार की तरफ से भी दी जाएगी.
•   इस योजना से जो भी व्यक्ति जुड़ेगा उसके पास आधार कार्ड और बैंक में अकाउंट होना जरूरी है.
•   इस योजना के तहत, जो लोग राष्ट्रीय पेंशन योजना, कर्मचारी राज्य बीमा निगम योजना या फिर कर्मचारी भविष्य निधि योजना में आते हैं वो इसके पात्र नहीं होंगे. इनकम टैक्स भरने वाले भी अपात्र होंगे.
•   इस स्कीम के लिए सरकार एक पेंशन फंड बनाएगी. इस फंड के जरिए ही सभी को पेंशन दी जाएगी.
•   अगर किसी कामगार की योजना के दौरान निधन हो जाता है तो उसकी पत्नी स्कीम में योगदान देकर इसको जारी रख सकती है. यदि कामगार के निधन पर उसकी पत्नी या पति योजना से बाहर होना चाहता है तो वो उनकी दी गई कुल रकम पर ब्याज के साथ इसे वापस ले सकते हैं.
•   यदि किसी की पेंशन शुरू हो गई है और उसके बाद उसका निधन होता है तो उसके पति या पत्नी का पेंशन की 50 फीसदी रकम मिलेगी.

राष्ट्रीय सैंपल सर्वे संगठन (एनएसएसओ) के आंकड़ों के मुताबिक देश में 40 करोड़ से ज्यादा मजदूर असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं. इनमें से आधे से भी ज्यादा मजदूर कृषि क्षेत्र में काम करते हैं. करीब पांच करोड़ लोग भवन निर्माण क्षेत्र में काम कर रहे हैं.

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भारतीय रिज़र्व बैंक ने कर्णाटका बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज़ बैंक और करूर वैश्य बैंक पर कुल 11 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने कर्णाटका बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज़ बैंक और करूर वैश्य बैंक पर कुल 11 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया है. स्विफ्ट प्रणाली से जुड़े सॉफ्टवेयर को लेकर दिशानिर्देशों का पालन नहीं करने पर यह जुर्माना लगाया गया है. स्विफ्ट वित्तीय संस्थानों द्वारा कोड प्रणाली का इस्तेमाल करके जानकारी-निर्देशों को सुरक्षित रूप से भेजने वाला मेसेजिंग नेटवर्क है.

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प्रयागराज कुंभ मेला 2019 में एक हफ्ते में 3 गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बने

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में जारी कुंभ मेला 2019 में एक हफ्ते में 3 गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बने हैं. सबसे ताज़ा रिकॉर्ड एक साथ कई जगहों पर सर्वाधिक लोगों द्वारा ज़मीन पर झाड़ू लगाने का बना है. इससे पहले, मेले में 'सर्वाधिक बसों की परेड' और '8 घंटे में एक हैंडप्रिंटिंग पेंटिग में सर्वाधिक लोगों का योगदान' के रिकॉर्ड बने थे.

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वायु प्रदूषण से भारत को सालाना 2 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान

अमेरिका स्थित इंटरनैशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्टडी के मुताबिक, पराली जलाने के कारण होने वाले वायु प्रदूषण से भारत को सालाना 2 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होता है. वहीं, पटाखों से होने वाले प्रदूषण से करीब 50,000 करोड़/वर्ष का नुकसान होता है.

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सरकार ने झारखंड में अडानी पावर की 14,000 करोड़ रुपये की परियोजना को मंज़ूरी दी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने झारखंड में अडानी पावर की 14,000 करोड़ रुपये की विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज़) परियोजना को मंज़ूरी दे दी है. उद्योगपति गौतम अडानी की अदाणी पावर ने 425 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली इस परियोजना को लगाने के लिए सरकार से मंज़ूरी मांगी थी. गौरतलब है कि इस परियोजना की सारी बिजली बांग्लादेश को निर्यात की जाएगी.

विश्व वन्यजीव दिवस: 3 मार्च
वन्यजीवों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए हर वर्ष 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस मनाया जाता है. इस तिथि को 20 दिसंबर 2013 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 68 वें सत्र में विश्व वन्यजीव दिवस के रूप में नामित किया गया था.

इस दिन, वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (CITES) पर हस्ताक्षर किए गए. विश्व वन्यजीव दिवस 2019 का विषय ‘‘Life below water: for people and planet’ है, जो सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के लक्ष्य 14 से मेल खाता है जो कि 'Life below water' है.

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