03 Apr, 2019
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भारतीय क्रिकेट टीम लगातार तीसरे साल टेस्ट रैंकिंग में नंबर-वन

भारतीय क्रिकेट टीम ने लगातार तीसरे साल आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप गदा अपने पास ही बरबरार रखी है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने 01 अप्रैल 2019 को इस बात की जानकारी दी.

यह गदा उस टीम को दी जाती है जो एक अप्रैल की कट ऑफ तारीख तक टेस्ट रैंकिंग (ICC Ranking) में नंबर-वन स्थान पर रहती है. आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में भारतीय टीम फिलहाल पहले नंबर पर है. न्यूजीलैंड की टीम दूसरे नंबर पर है.

प्रमुख बातें:
•   भारत को शीर्ष पर बने रहने के लिए 10 लाख डॉलर की इनामी राशि दी जाएगी. न्यूजीलैंड को पांच लाख डॉलर (लगभग 3.46 करोड़ रुपए) की राशि दी जाएगी.
•   भारतीय टीम ने कप्तान विराट कोहली के नेतृत्व में इस साल टेस्ट में अच्छा प्रदर्शन करते हुए नंबर-वन स्थान अपने पास ही रखा है.
•   भारतीय टीम ने इसी साल ऑस्ट्रेलिया में 71 साल बाद टेस्ट सीरीज पर कब्जा जमाया था.
•   वहीं, न्यूजीलैंड ने हाल ही में टेस्ट सीरीज में बांग्लादेश को मात देकर तीसरे से दूसरे स्थान पर कब्जा किया था.
•   दक्षिण अफ्रीका तीसरे और ऑस्ट्रेलिया की टीम चौथे नंबर पर रही.
•   दक्षिण अफ्रीका ने दो लाख डॉलर और ऑस्ट्रेलिया ने एक लाख डॉलर की इनामी राशि पर कब्जा किया.

भारत ने एक अप्रैल 2018   से 31 मार्च 2019 के बीच तीन देशों के साथ 11 टेस्ट मैच खेले. उसने इनमें से   पांच मैच जीते और पांच मैच हारे तथा एक मैच बराबरी पर खत्म हुआ था. विश्व टेस्ट   चैंपियनशिप के खिताब के लिए 9 देश 27 सीरीज में 71 टेस्ट मैच खेलेंगे. इसका   फाइनल साल 2021 में खेला जाएगा जिससे चैंपियन का चयन होगा.

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डोनाल्ड ट्रम्प ने अल-सेल्वाडोर, होंडुरास और ग्वाटेमाला को वित्तीय सहायता नहीं दी

मेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में तीन देशों – अल-सेल्वाडोर, होंडुरास और ग्वाटेमाला को दी जाने वाली वित्तीय सहायता नहीं दिए जाने की घोषणा की. ट्रम्प प्रशासन का कहना है कि इन तीन देशों से अमेरिका में सबसे अधिक अवैध प्रवासी आते हैं

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एस्टोनिया के आम चुनावों में 44 फीसदी लोगों ने ऑनलाइन वोट डाला

एस्टोनिया के आम चुनावों में 44 फीसदी लोगों ने ऑनलाइन ही अपना वोट डाला. यह विश्व में सबसे अधिक है. एस्टोनिया में ऑनलाइन वोटिंग करने वाले 25 फीसदी लोग ऐसे थे, जिनकी आयु 55 साल से अधिक थी

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मवेशियों के शवों को खाने से लुप्तप्राय प्रजातियों के लगभग 37 गिद्धों की मौत

हाल ही में पूर्वी असम के शिवसागर जिले में ज़हर मिले हुए मवेशियों के शवों को खाने से तीन लुप्तप्राय प्रजातियों के लगभग 37 गिद्धों की मौत हो गई। इन गिद्धों में से अधिकांश हिमालयन ग्रिफन (Himalayan griffon) हैं।

प्रमुख बिंदु:-
गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र (Vulture Conservation Breeding Centre- VCBC) के वन अधिकारियों और एक वन्यजीव बचाव दल ने लगभग इतने ही गिद्धों को गंभीर हालत में पाया जिन्हें उचित चिकित्सा और देखभाल द्वारा बचा लिया गया है।
हालाँकि इस बात की सटीक जानकारी नहीं प्राप्त की जा सकी है कि इन गिद्धों में ज़हर का कितना असर हुआ है।
एक जैव वैज्ञानिक के अनुसार, बचाए गए गिद्धों को कम-से-कम 10 दिनों के लिये काजीरंगा के वन्यजीव पुनर्वास और संरक्षण केंद्र में रखकर उपचार और अवलोकन की आवश्यकता है।
यह घटना बाम राजाबारी गाँव में हुई थी, जहाँ पिछले साल अप्रैल में 20 गिद्धों की मौत इसी प्रकार ज़हरीले शवों को खाने के कारण हुई थी।
ग्रामीणों द्वारा कुत्तों को मारने के लिये मवेशियों के शवों मे ज़हर मिलाया गया था लेकिन इससे गिद्धों की मृत्यु हो गई।
1990 के दशक में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और अन्य संगठनों के एक अध्ययन में पाया गया है कि जिप्स समूह वाले गिद्धों की संख्या में भारत और नेपाल में पिछले दो दशकों में भारी गिरावट आई है

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भारतीय निर्वाचन आयोग ने रेडियो स्टेशनों के साथ मिलकर मतदाताओं को जागरूक करने के लिए पहल की

भारतीय निर्वाचन आयोग ने देश भर में 150 से अधिक रेडियो स्टेशनों के साथ मिलकर मतदाताओं को जागरूक करने के लिए पहल शुरू करने का निर्णय लिया है.

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सुप्रीम कोर्ट के अनुसार दिल्ली में कारों के लिए भी 'हम दो, हमारे दो' जैसी नीति लागू की जानी चाहिए

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, दिल्ली को रहने लायक बनाने के लिए परिवार नियोजन की तरह कारों के लिए भी 'हम दो, हमारे दो' जैसी नीति लागू की जानी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि एक आदमी के पास 5 कारें होना चिंताजनक है. गौरतलब है कि दिल्ली में कारों की संख्या करीब 32 लाख है

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रॉजर फेडरर ने करियर का 101वां सिंगल्स खिताब जीता

20 ग्रैंड स्लैम विजेता रॉजर फेडरर ने 31 मार्च को फाइनल में जॉन इसनर को हराकर चौथी बार मियामी ओपन और करियर का 101वां सिंगल्स खिताब जीत लिया. फेडरर ने यह मैच 6-1,6-4 से जीतकर अपने 50वें फाइनल में 28वां एटीपी मास्टर्स खिताब जीत लिया

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02 अप्रैल: विश्व ऑटिज्म जागरुकता दिवस

विश्वभर में 02 अप्रैल 2019 को अंतरराष्ट्रीय ऑटिज्म जागरुकता दिवस मनाया गया. इस वर्ष का विषय सहायक तकनीक, सक्रिय भागीदारी है.
यह एक अंतरराष्ट्रीय दिवस है जिसमें संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राष्ट्रों को ऑटिज्म से लड़ने तथा इसका निदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.
इस दिन उन बच्चों और बड़ों के जीवन में सुधार के कदम उठाए जाते हैं, जो ऑटिज्म ग्रस्त होते हैं और उन्हें सार्थक जीवन बिताने में सहायता दी जाती है. नीला रंग ऑटिज्म का प्रतीक माना गया है.

उद्देश्य:
इस दिवस का उद्देश्य   ऑटिज्म से ग्रस्त बच्चों तथा बड़ों के जीवन में सुधार हेतु कदम उठाना और उन्हें   सार्थक जीवन व्यतीत करने में मदद करना है. यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा   में मतदान के बिना अपनाया गया.
इसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा मानव अधिकारों में   सुधार के लिए पूरक के रूप में अपनाया गया. विश्व ऑटिज्म दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा   स्वास्थ्य संबंधी मनाये जाने वाले चार दिवसों में से एक है.

आटिज्म क्या है?
•    ऑटिज्म मस्तिष्क विकास में उत्पन्न बाधा संबंधी विकार है.
•    ऑटिज्म से ग्रसित व्यक्ति दूसरों से अलग स्वयं में खोया रहता है.
•    व्यक्ति के विकास संबंधी समस्याओं में ऑटिज्म तीसरे स्थान पर है. अर्थात् व्यक्ति के विकास में बाधा पहुंचाने वाले मुख्य कारणों में ऑटिज्म भी जिम्मेदार है.
•    ऑटिज्म के रोगी को मिर्गी के दौरे भी पड़ सकते हैं.
•    ऑटिज्म पूरी दुनिया में फैला हुआ है. एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2010 तक विश्व में तकरीबन 7 करोड़ लोग ऑटिज्म से प्रभावित थे.
•    जिन बच्चों में यह रोग होता है उनका विकास अन्य बच्चों से असामान्य होता है, साथ ही इसकी वजह से उनके न्यूरोसिस्टम पर विपरीत प्रभाव पड़ता है

पृष्ठभूमि:
संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 62/139 प्रस्ताव के तहत इसका निर्धारण किया गया. इसे काउंसिल द्वारा 1 नवंबर 2007 को पारित किया गया जबकि 18 दिसंबर 2007 को अपनाया गया. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2007 में दो अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस घोषित किया था

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सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएफओ की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने 01 अप्रैल 2019 को कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (ईपीएफओ) की याचिका को खारिज करते हुए केरल हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें कर्मचारियों को उनकी पूरी सैलरी के हिसाब से पेंशन देने का आदेश दिया गया था. इस फैसले के बाद निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को भी ज्‍यादा पेंशन मिलेगी.
केरल हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में ईपीएफओ को कहा था कि रिटायर होने वाले कर्मचारियों को उनकी अंतिम सैलरी के आधार पर पेंशन मिलनी चाहिए. ईपीएफओ ने केरल हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया फैसला:
•   सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को मिलने वाली पेंशन को पूरी सैलरी के आधार पर देने का आदेश दिया है, जिससे रिटायर कर्मचारियों को अब कई गुना बढ़ी हुई पेंशन मिलेगी.
•   सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएफओ की वह याचिका भी खारिज कर दी है, जिसमें कर्मचारियों की पेंशन की गणना नौकरी के अंतिम पांच सालों की औसत सैलरी के आधार पर करने की मांग की गई थी.
•   सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के फैसले का समर्थन करते हुए कर्मचारियों के रिटायरमेंट के अंतिम साल की सैलरी के आधार पर ही पेंशन देने का फैसला दिया है.
•   मौजूदा समय में ईपीएफओ पेंशन की गणना प्रतिमाह 1250 रुपये (15000 का 8.33 फीसदी) के हिसाब से करता है.

कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (ईपीएफओ)
कर्मचारी भविष्य निधि   संगठन, भारत की एक राज्य प्रोत्साहित अनिवार्य अंशदायी पेंशन और   बीमा योजना प्रदान करने वाला शासकीय संगठन है. सदस्यों और वित्तीय लेनदेन की मात्रा के मामले में यह विश्व की सबसे बड़ा   सगठन है.
इसका मुख्य कार्यालय   दिल्ली में है. ईपीएस की शुरुआत वर्ष 1995 में की गई थी. तब नियोक्ता   कर्मचारी की सैलरी का अधिकतम सालाना 6,500 (541 रुपये महीना)   का 8.33 प्रतिशत ही ईपीएस के लिए जमा कर सकता था
इस नियम में मार्च 1996   में बदलाव किया गया कि अगर कर्मचारी फुल सैलरी के हिसाब से योजना में योगदान   देना चाहे और नियोक्ता भी राजी हो तो उसे पेंशन भी उसी हिसाब से मिलनी चाहिए. कर्मचारियों के   बेसिक वेतन का 12 फीसदी हिस्सा पीएफ में जाता है और 12 फीसदी उसके नाम से   नियोक्ता जमा करता है.
कंपनी की 12 फीसदी   हिस्सेदारी में 8.33 फीसदा हिस्सा पेंशन फंड में जाता और बाकी 3.66 पीएफ में   जाता है. संगठन के प्रबंधकों में केंद्रीय न्यासी मण्डल, भारत सरकार और राज्य सरकार के प्रतिनिधि, नियोक्ता और   कर्मचारी शामिल होतें हैं. इसके अध्यक्षता भारत के केंद्रीय श्रम मंत्री करतें   हैं.

पृष्ठभूमि:
ईपीएफओ द्वारा वर्ष 2014 में किए गए संशोधन के बाद निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की पेंशन की गणना 6400 के स्‍थान पर 15000 के आधार पर करने को मंजूरी दी गई थी. हालांकि इसमें यह भी कहा गया था कि पेंशन की गणना कर्मचारी की पिछले पांच साल की औसत सैलरी के आधार पर होगी.

इससे पहले यह गणना रिटायरमेंट से पहले के एक साल के आधार पर की जाती थी. यह मामला केरल हाईकोर्ट में पहुंचा. केरल हाईकोर्ट ने अपने फैसले में संशोधन कर पेंशन की गणना का आधार रिटायरमेंट से पहले के एक साल को बना दिया तथा पांच साल वाली बाध्‍यता को समाप्‍त कर दिया गया. केरल हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ ईपीएफओ ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की

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ओडिशा की कंधमाल हल्दी को भौगोलिक संकेतक टैग प्रदान किया

ओडिशा की कंधमाल हल्दी को विशिष्ट भौगोलिक पहचान के लिए भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्रदान किया गया. कंधमाल की लगभग 15 प्रतिशत आबादी हल्दी की खेती से जुड़ी हुई है. जीआई टैग प्राप्त हो जाने से इसे विश्व बाजार में एक स्वतंत्र स्थान मिल जायेगा.

इसके पंजीकरण हेतु कंधमाल अपेक्स स्पाइसेज असोसिएशन फॉर मार्केटिंग द्वारा प्रयास किया गया था. इसके पंजीकरण आवेदन को वस्तु भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम की धारा 13 की उपधारा 1 के तहत मंजूरी दिया गया है.

कंधमाल हल्दी की विशेषता
कंधमाल हल्दी स्वास्थ्य   के लिए काफी उपयोगी मानी जाती है. यह कंधमाल के जनजातीय लोगों की प्रमुख नकदी   फसल है. इस हल्दी का उपयोग घरेलु के अतिरिक्त सौन्दर्य उत्पादों तथा औषधीय   कार्यों के लिए भी किया जाता है.

इस हल्दी की मुख्य खासियत   यह है कि इसके उत्पादन में किसानों द्वारा किसी तरह के कीटनाशक का प्रयोग नहीं   किया जाता है. स्थानीय लोग ही नहीं शासन तंत्र भी कंधमाल हल्दी को   स्वतंत्रता का प्रतीक यानी अपनी उपज मानता है.

भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग) के बारे में:
•    जीआई टैग अथवा भौगोलिक चिन्ह किसी भी उत्पाद के लिए एक चिन्ह होता है जो उसकी विशेष भौगोलिक उत्पत्ति, विशेष गुणवत्ता और पहचान के लिए दिया जाता है और यह सिर्फ उसकी उत्पत्ति के आधार पर होता है.
•    ऐसा नाम उस उत्पाद की गुणवत्ता और उसकी विशेषता को दर्शाता है.
•    दार्जिलिंग चाय, महाबलेश्वर स्ट्रोबैरी, जयपुर की ब्लूपोटेरी, बनारसी साड़ी और तिरूपति के लड्डू कुछ ऐसे उदाहरण है जिन्हें जीआई टैग मिला हुआ है.
•    ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले हमारे कलाकारों के पास बेहतरीन हुनर, विशेष कौशल और पारंपरिक पद्धतियों और विधियों का ज्ञान है जो पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होता रहता है और इसे सहेज कर रखने तथा बढ़ावा देने की आवश्यकता है.
•    जीआई उत्पाद दूरदराज के क्षेत्रों में किसानों, बुनकरों शिल्पों और कलाकारों की आय को बढ़ाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचा सकते हैं.

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